कृषि संसाधन विभाग

आरएसएसी – यूपी का कृषि संसाधन प्रभाग मल्टी टेम्पोरल व मल्टी स्पेक्ट्रल डाटा का प्रयोग करते हुए तथा डिजिटल व दृश्य व्याख्या प्रौद्योगिकी के साथ फसलों के आंकलन व निगरानी कार्य में प्रभावी रूप से संलिप्त रहा है | प्रभाग की मुख्य गतिविधि कृषि पूर्व क्षेत्रफल तथा अनुमानित उत्पादन के फ़सलवार आंकड़े यथा गेहूं, धान, सरसों, आलू, गन्ना एवं रबी की दलहन, प्रदान करना है | प्रत्येक फ़सली सीज़न के आंकड़े उपयोगकर्ता विभागों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं | प्रभाग की अन्य गतिविधियों में बड़े बगीचों यथा आम, आँवला तथा अमरूद के क्षेत्र का आंकलन करना व रेशम कीट पालन के विकास का अध्ययन करना, खेती की पद्धति का विश्लेषण, फ़सली नुकसान के आंकलन का अध्ययन करना, फ़सल स्थिति आंकलन का अध्ययन करना आदि सम्मिलित हैं | प्रभाग ने एक वेब पोर्टल भी निर्मित किया है जो फसलों के अवशेष जलाए जाने पर संबन्धित अधिकारी व संबन्धित जिलाधिकारी को त्वरित सूचना प्रदान करता है | एक मोबाएल एप्प भी विकसित की गई है जिससे कृषक द्वारा आलू के भडारण हेतु निकटतम शीतगृह की स्थिति तथा उस तक पहुँचने का मार्ग भी पता लगाया जा सकता है | प्रभाग ने राज्य व राष्ट्रीय स्तर की बहुत सी परियोजनाओं यथा भू-उपयोग मानचित्रण, उत्तर प्रदेश की नमक प्रभावित मृदा, उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड को सम्मिलित करते हुए) के वृहद जल-प्रभावित भाग के वर्गीकरण, टिहरी बांध के जलग्रहण क्षेत्र में मृदा अध्ययन, बंजर भूमि मानचित्रण, ग्लोबल वार्मिंग के मापन हेतु मीथेन गैस के स्तर का अध्ययन, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल व झारखंड के कुछ भागों के मरूस्थलीकरण स्तर का अध्ययन को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है | प्रभाग ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों व राष्ट्रीय संस्थानों यथा एनआरएसए- हैदराबाद, एसएसी-अहमदाबाद, विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग, तथा भारत सरकार व राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के साथ बहुत सी परियोजनाओं में सहयोग किया है | प्रभाग अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों यथा विश्व बैंक, जेआईसीए तथा ईईसी द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के साथ भी जुड़ा रहा है |

डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय

डॉ. राजेश कुमार उपाध्याय
पदनाम वैज्ञानिक-एस ई व प्रमुख, ए.आर.डी
नियुक्ति प्रमुख, कृषि संसाधन प्रभाग
अन्य गतिविधि अपीलीय अधिकारी (आर टी आई)
विशेषज्ञता का क्षेत्र औद्यानिक
अनुभव 23 वर्ष
प्रकाशन 31 शोध पत्र/31 तकनीकी रिपोर्ट्स
संपर्क +91-9452841212, +91-8765977664
ई-मेल rsacupard@gmail.com

श्री नरेंद्र कुमार

श्री नरेंद्र कुमार
पदनाम  वैज्ञानिक एस-ई
नियुक्ति कृषि संसाधन प्रभाग
विशेषज्ञता का क्षेत्र कृषि विज्ञान
अनुभव 23 वर्ष
प्रकाशन 8 शोध पत्र/ 21 तकनीकी रिपोर्ट्स
संपर्क +91-8765977663, +91-9450459205
ई-मेल rsacupnk@radiffmail.com

डा॰ शिवपाल सिंह जादौन

डा॰ शिवपाल सिंह जादौन
पदनाम वैज्ञानिक-एसई
नियुक्ति कृषि संसाधन प्रभाग
अन्य गतिविधि जन सूचना अधिकारी (आर टी आई)
विशेषज्ञता का क्षेत्र मृदा
अनुभव 27 वर्ष
प्रकाशन 23 शोध पत्र/31 तकनीकी रिपोर्ट
संपर्क +91-8765977660
ई-मेल Shivpalsingh.jadaun@gmail.com jadaun_13@radiffmail.com

श्री पी.एस.यादव

श्री पी.एस.यादव
पदनाम वैज्ञानिक एस-डी
नियुक्ति मृदा संरक्षण व जल प्रबंधन
विशेषज्ञता का क्षेत्र कृषि संसाधन प्रभाग
अनुभव 14 वर्ष
प्रकाशन 5 शोध पत्र/ तकनीकी रिपोर्ट्स
संपर्क +91-9450170772
ई-मेल ppsyadav77@gmail.com

फसल (अंतरिक्ष, कृषि-मौसम विज्ञान और भूमि आधारित टिप्पणियों का उपयोग करके कृषि उत्पादन का पूर्वानुमान)

  • चमन परियोजना , एस ए सी अहमदाबाद द्वारा प्रायोजित  
  • फोडर फसल आंकलन परियोजना, एस ए सी अहमदाबाद द्वारा प्रायोजित
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए फ़सली भूमि के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नहर सिंचाई व्यवस्था का  प्रभाव, फसलों की गहनता व उत्पादकता की निगरानी -  विश्व बैंक द्वारा प्रायोजित
  • रिमोट सेन्सिंग तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सभी रेशम कीट पालन केन्द्रों का अद्यतन – उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारोजित 
  • उत्तर प्रदेश के मथुरा, रामपुर, बिजनौर, कुशीनगर तथा गोरखपुर जनपदों में बागवानी फसलों के क्षेत्र की गणना व मानचित्रण – उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस तकनीक का प्रयोग करते हुए ब्लाक स्तर पर आलू की कृषि के क्षेत्र का आंकलन – उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित
  • फसलों के अवशेष का जलना एवं प्रबंधन प्रणाली परियोजना – राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एन.जी.टी.) द्वारा प्रायोजित
  • 1988-89 का सेटेलाइट डाटा प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में भू-उपयोग/लैंडकवर का मानचित्रण
  • फ़सली क्षेत्र व उत्पादन अनुमान (सीएपीई) (1991-1997)
  • रेशम कीट पालन विकास में रिमोट सेन्सिंग का अनुप्रयोग (1997-2000)
  • बंजर भूमि मानचित्रण फेज-V (1999-2003)
  • आम का क्षेत्र एवं उत्पादन आंकलन (2000-2002)
  • आँवला का क्षेत्र व उत्पादन आंकलन परियोजना (आर & डी) (2001-2003)
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के जनपदों में कृषि परियोजनाओं का वृहद प्रबंधन/भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण (2002-2004)
  • एल आई एस एस –III उपग्रहीय डाटा हेतु उत्तर प्रदेश का जियो-रिफरेंस डाटाबेस तैयार करना (2004)
  • उत्तर प्रदेश में रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए मेंथा फसल के क्षेत्रों का आंकलन (2008-2009)
  •  सिंधु-गंगा के मैदान में रिमोट सेन्सिंग तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए फ़सली पद्धति का विश्लेषण (2006-2008)
  • धान के क्षेत्रों में मीथेन गैस का आंकलन (2006-2007)
  • राष्ट्रीय बंजर भूमि अद्यतन परियोजना (2004-2005)
  • रिमोट सेन्सिंग तथा जीआईएस तकनीक का प्रयोग करते हुए फसलों की दशा, क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन (2009-2012)  
  • प्लॉट लेवल प्रोजेक्ट पर फसलों का क्षेत्र आंकलन हेतु रिमोट सेन्सिंग आधारित कार्यप्रणाली परियोजना (2009-2011)
  • उत्तर प्रदेश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों हेतु मौसम-फसल की उपज मॉडल का विकास (2010-2012)
  • गोंडा, बलिया, पीलीभीत, ललितपुर, महोबा व झांसी जनपदों में फेज-1 में रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस तकनीक का प्रयोग करते हुए संभावित कृषियोग्य बंजर भूमि क्षेत्र का आंकलन | (2010-2012)
  • रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए ग्राम/प्लॉट लेवेल पर रेशम कीट पालन का विकास करने हेतु कृषि योग्य उपयुक्त बंजर भू-क्षेत्रों का चिन्हीकरण (2012-13 से 2016-17)  
  • कृषि भूमि प्रयोग पर शारदा सहायक नहर नियंत्रण के प्रभाव की निगरानी |
  • उत्तर–प्रदेश में खाद्य आपूर्ति हेतु आलू की फसल के क्षेत्र का आंकलन तथा कोल्ड स्टोरेज हेतु जीआईएस डाटाबेस की तैयारी का अध्ययन |
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए रेशम कीट पालन का विकास – एन ई एस ए सी, शिलोंग, मेघालय द्वारा प्रायोजित |
  • फ़सल – शोध एवं विकास परियोजना, एसएसी अहमदाबाद द्वारा प्रायोजित
  • वित्तीय वर्ष 2003-2004 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 12 जनपदों में फ़सल पूर्व गन्ना बुआई के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2004:02
  •  वित्तीय वर्ष 2004-2005 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 10 जनपदों में फ़सल पूर्व गन्ना बुआई के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2005:02
  • वित्तीय वर्ष 2005-2006 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 16 जनपदों में फ़सल पूर्व गन्ना बुआई के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2006:02
  • वित्तीय वर्ष 2006-2007 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों में फ़सल पूर्व गन्ना बुआई के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2007:02
  •  वित्तीय वर्ष 2007-2008 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 14 जनपदों में फ़सल पूर्व गन्ना बुआई के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2008:02
  • वित्तीय वर्ष 2004-2005 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 06 जनपदों में फ़सल पूर्व सरसों के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2005:03
  •  वित्तीय वर्ष 2005-2006 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 08 जनपदों में फ़सल पूर्व सरसों के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2006:03
  • वित्तीय वर्ष 2006-2007 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 07 जनपदों में फ़सल पूर्व सरसों के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2007:03
  •  वित्तीय वर्ष 2007-2008 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 08 जनपदों में फ़सल पूर्व सरसों के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2008:03
  •   वित्तीय वर्ष 2008-2009  हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 08 जनपदों में फ़सल पूर्व सरसों के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2009:03
  • वित्तीय वर्ष 2004-05 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में फ़सल पूर्व गेहूं के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2005:04   
  • वित्तीय वर्ष 2005-06  हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में फ़सल पूर्व गेहूं के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2006:04 
  • वित्तीय वर्ष 2006 -07  हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में फ़सल पूर्व गेहूं के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2007:04 
  • वित्तीय वर्ष 2008-09 हेतु आईआरएस एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में फ़सल पूर्व गेहूं के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2009:02 
  • रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जनपद में कृषि भूमि उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी : एमएमपी : 2003:04
  •  रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर  जनपद में कृषि भूमि उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी : एमएमपी : 2003:04
  • रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में कृषि भूमि उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी : एमएमपी : 2003:01
  • वित्तीय वर्ष 2004-05 हेतु आईआरएस 1सी/1डी एलआईएसएस–III डाटा का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के 53 जनपदों में फ़सल पूर्व गेहूं के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन  - आरएसएसी : यूपी : सीएपीई :II 2005:04 
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस :2009:02
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के जे.पी. नगर जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस :2009:02
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद  जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस :2009:03
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के जौनपुर जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस :2009:04 
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस :2009:05 
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस :2009:06  
  • रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस : 2009:07
  •  रिमोट सेन्सिंग/जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण : आरएसएसी : एसएआरडी :एनआरआईएस : 2009:08
  • रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में मेंथा फ़सल के क्षेत्र का आंकलन  आरएसएसी : एसएआरडी : 2009:01
  • रिमोट सेन्सिंग पर आधारित ग्राम स्तर  पर फ़सल    क्षेत्र का आंकलन करने की कार्य प्रणाली – आरएसएसी : एसएआरडी : 2010-1
  •  वित्तीय वर्ष 2011-12  में सेटेलाइट डाटा का प्रयोग करते हुए ब्लॉक स्तर पर उत्तर प्रदेश के 27 जनपदों में फ़सल पूर्व गन्ना बुआई के क्षेत्र व उत्पादन का आंकलन |
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए ब्लॉक स्तर पर औदयानिक फ़सलों के क्षेत्र का आंकलन व मानचित्रण |
  • उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों की निगरानी – आरएसएसी : एआर डी : एसईआरआई : 2012-13:01
  • उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों की निगरानी – आरएसएसी : एआर डी : एसईआरआई : 2012-13:02
  • उत्तर प्रदेश के ललितपुर जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों की निगरानी – आरएसएसी : एआर डी : एसईआरआई : 2012-13:03
  • उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों की निगरानी – आरएसएसी : एआर डी : एसईआरआई : 2013-14 : 01
  • उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों की निगरानी – आरएसएसी : एआर डी : एसईआरआई : 2013-14 : 02
  • उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों की निगरानी – आरएसएसी : एआर डी : एसईआरआई : 2013-14 : 03
  • उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2014:15-01
  • उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2014:15-02
  • उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2014:15-03
  • उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2015 : 16 – 01
  • उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2015 : 16 – 02
  •  उत्तर प्रदेश के कन्नौज जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2015 : 16 – 03
  • उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2015 : 16 – 04
  • उत्तर प्रदेश के औरैया में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2016-17 : 01
  • उत्तर प्रदेश के बांदा में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2016-17 : 02
  • उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में प्लॉट/ग्राम्य स्तर पर रेशम कीट पालन विकास हेतु रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए प्रयोज्य बंजर भूमि में से उचित स्थानों का चिन्हीकरण  – आरएसएसी : एआरडी : एसईआरआई : 2016-17 : 03
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में नहर नियंत्रण के आधारिक अध्ययन पर एक रिपोर्ट – उत्तर प्रदेश जल पुनर्रचना परियोजना (फ़ेज़ –II) आर एस ए सी: ए आर डी : 2014-15
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में नहर नियंत्रण के अध्ययन पर एक रिपोर्ट – उत्तर प्रदेश जल पुनर्रचना परियोजना (फ़ेज़ –II)  (बुंदेलखंड नहर नियंत्रण क्षेत्र - आरएसएसी: एआरडी : 2014-15
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में नहर नियंत्रण के अध्ययन पर एक रिपोर्ट – उत्तर प्रदेश जल पुनर्रचना परियोजना (फ़ेज़ –II)  (निचली गंगा नहर नियंत्रण क्षेत्र) - आरएसएसी: एआरडी : 2014-15
  • रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में नहर नियंत्रण के अध्ययन पर एक रिपोर्ट – उत्तर प्रदेश जल पुनर्रचना परियोजना (फ़ेज़ –II)  (हैदरगढ़ नहर नियंत्रण क्षेत्र) - आरएसएसी: एआरडी : 2014-15
  • उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में ग्रीष्म कालीन धान की खेती का प्रभाव – आरएसएसी: एआरडी : 2018 :05
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, आर.के. उपाध्याय, एस.पी.एस. जादौन, शमीउद्दीन अहमास, शोभित पीपल व वीरेंद्र कुमार (फ़रवरी, 2010)   “ वर्तमान भू-उपयोग में उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद में कृषि की पद्धति में परिवर्तन का पता लगाता एक अध्ययन”   जियोमैटिक्स 2010 की कार्यवाही में प्रकाशित हुआ था, जिसे 4 से 6 फरवरी, 2010 के मध्य इंडियन सोसाइटी ऑफ जियोमैटिक्स द्वारा आयोजित व स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद द्वारा होस्ट किया गया था |
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, विभु सरीन, आर.के. उपाध्याय, एस.पी.एस. जादौन व पी. एन. शाह (मार्च, 2008) – “उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी का भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण में अनुप्रयोग”  जो “7-8 मार्च, 2008 को आयोजित भू-उपयोग/लैंड कवर परिवर्तन व कृषि-जैव विविधता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन”   की कार्यवाही में प्रकाशित हुआ था |
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, विभु सरीन, आर.के. उपाध्याय व पी. एन. शाह (दिसम्बर, 2007) “उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद में डिजिटल रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण एवं निगरानी”  जो कि आईएसआरएस देहरादून द्वारा आयोजित व नेटमो कोलकाता द्वारा 10-20 दिसम्बर, 2007 के मध्य होस्ट “27वें राष्ट्रीय समारोह व उच्च रेज़ोल्यूशन रिमोट सेन्सिंग व थीमेटिक एप्लीकेशन्स” की कार्यवाही में प्रकाशित किया गया था |
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, विभु सरीन, आर.के. उपाध्याय, अमित सिन्हा, सुधाकर शुक्ला, एस.पी.एस. जादौन व वीरेंद्र कुमार (जनवरी, 2007) – “उत्तर प्रदेश में बड़े नगरों का फैलाव- रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक अध्ययन” – जिसे 22-25 जनवरी, 2007 को हैदराबाद में सम्पन्न “मैप वर्ल्ड फोरम” में प्रस्तुत किया गया था |
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, आर. के. उपाध्याय (नवम्बर, 2006)  “उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद में  रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए भू-उपयोग/लैंड कवर की निगरानी” – जिसे भारतीय राष्ट्रीय कार्टोग्राफ़िक एसोसिएशन, नई दिल्ली द्वारा 22-24 नवम्बर, 2006 को 36वीं अंतर्राष्ट्रीय कॉंग्रेस में प्रस्तुत किया गया था |
  • वीरेंद्र कुमार,एस.पी.एस. जादौन व अश्वनी के. श्रीवास्तव, 2010 – उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए भू-उपयोग व लैंड कवर मानचित्रण- टेकनो फ़ेम पृष्ठ 59-64 वॉल्यूम-1 (2010)
  • एम.एस. यादव, पी.पी.एस. यादव, मनीष यदुवंशी, धर्मेश वर्मा – रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए सोडियम युक्त भूमि के सुधार की स्थिरता का आंकलन” – इनवायरनमेंट प्लानिंग मैप इंडिया, 2005, नई दिल्ली
  • एम.एस. यादव, पी.पी.एस. यादव, मनीष यदुवंशी, धर्मेश वर्मा , ए. एन. सिंह (2010) रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए सोडियम युक्त भूमि के सुधार की स्थिरता का आंकलन” -  इंडियन सोसाईटी ऑफ रिमोट सेन्सिंग 38:269-278
  • पी.पी.एस यादव*, कौशलेन्द्र सिंह, बी. लाल, आलोक माथुर, पी. सी. गुप्ता व ए. एन. सिंह (2015) | मध्यम व उच्च रेज़ोल्यूशन उपग्रह डाटा का खड्डे की भूमि के सुधार/बेहतर भू-उपयोग नियोजन स्थिरता में प्रयोग हेतु मूल्यांकन” – “सतत भू-संसाधन विकास में जियोस्पेटियल प्रोद्योगिकी व 3 डी अनुप्रयोग पर राष्ट्रीय सम्मेलन (10)
  • दिलीप कुमार, बी.एस. खेरवात, पी.पी. सिंह यादव, मुन्नालाल, राजेश कुमार उपाध्याय व सुशील कुमार (2012) – रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में बाघिन नदी के भाग की निगरानी व मॉडेलिंग    - एशियन जर्नल ऑफ स्वाइल स्वाइल साइंस 7 (2):392-395
  • वीरेंद्र कुमार, कमलेश भालावी, गौरव सोनी, भावना, राजीव मोहन व एस.पी.एस. जादौन -  उच्च रेज़ोल्यूशन रिमोट सेन्सिंग डाटा व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए बाराबंकी नियामक क्षेत्र के भू-उपयोग का मानचित्रण  -  जे ए यू टी एस , वॉल्यूम .2, इश्यू 1 व 2 जून व दिसम्बर 2015, पृष्ठ 14-22। आई एस एस एन-2395-4361 (पी)  
  • एस.पी.जादौन, आर.के.उपाध्याय, बंदना सिंह चंदेल व धीरज कुमार द्विवेदी -  रिमोट सेंसिंग और जी.आई.एस. प्रौद्योगिकी का उपयोग करके कृषि उत्पादन के लिए वाटरशेड की प्राथमिकता और परिशोधन पर एक अध्याय -  प्रोफ़ेसर आर एन तिवारी, भूगर्भशास्त्र विभागाध्यक्ष, राजकीय पी.जी. साइंस कॉलेज, रींवा, मध्य प्रदेश द्वारा संपादित “भूजल पर एक पुस्तक” में दिनांक 05 फ़रवरी, 2016 को प्रकाशित  |
  • पी.पी.एस. यादव, अर्जुन सिंह, जी. राजपूत व के. सिंह (2016) – “उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद  के एक भाग में आई आर एस –एल आई एस एस –IV  व कार्टोसैट -1 मर्ज्ड डाटा का प्रयोग कर सतत भूमि व फसल प्रबंधन व मृदा मानचित्रण” -  “एग्रो पैडोलोजी” (दिसंबर संस्करण) में प्रकाशित   |
  • पी. एन. शाह, ए. उनियाल, पी.के. गोस्वामी, वी. कुमार, एस.पी.एस. जादौन व रामचन्द्र (2012) – “रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए कुमाऊँ हिमालय क्षेत्र के नैनीताल व अल्मोड़ा जनपदों में भूस्खलन के खतरे का क्षेत्रीयकरण व प्रबंधन” – भारतीय भूस्खलन , वॉल्यूम 5, संस्करण 1, 2012; पृस्ठ 23-24 में प्रकाशित (राष्ट्रीय सूचना प्रबंधन संस्थान, शिलोंग द्वारा प्रकाशित) 
  • अश्वनी के.  श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, आर.के. उपाध्याय, एस.पी.एस.जादौन व वीरेंद्र कुमार (सितम्बर 2006) “ उत्तर प्रदेश के बड़े नगरों के विकास की स्थिति” – रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस तकनीक का प्रयोग करते हुए एक आंकलन – गोआ में 27-30 सितम्बर, 2006 के मध्य सम्पन्न हुए आई एस पी आर एस तकनीकी आयोग IV सेमिनार व आई एस आर एस वार्षिक सम्मेलन “ सतत विकास हेतु भूस्थानिक डाटाबेस”(स्पेस एप्लीकेशन केंद्र , अहमदाबाद (इसरो, भारत सरकार द्वारा आयोजित)  के लिए पोस्टर प्रेजेंटेशन हेतु स्वीकृत 
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, एस.पी.एस. जादौन, आर.के.उपाध्याय, अमित सिन्हा व अंजनी कुमार टांगड़ी (2004) – “मल्टी डेट्स उपग्रह डाटा का प्रयोग करते हुए आगरा नगर के फैलाव की निगरानी”  - 18-19 अक्तूबर, 2004 को आगरा में सम्पन्न हुए “एशिया में बड़े नगरों की शहरी सुरक्षा में नई तकनीक का प्रयोग” पर 3सरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया |    
  • धीरज के. द्विवेदी, डा॰ आर. के. उपाध्याय तथा डा. रवि चौरे – “ रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में भू प्रयोग मानचित्रण” -  लखनऊ में  8-9 नवंबर, 2014 को आयोजित “वृहद पैमाने पर मानचित्रण व इसका देश के सामाजिक – आर्थिक विकास पर प्रभाव” विषय पर राष्ट्रीय सेमीनार में प्रस्तुत  |
  • डा॰ रवि चौरे, धीरज के. द्विवेदी, डा॰ आर. के. उपाध्याय, बंदना सिंह चंदेल व तारा पाण्डेय – “ रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए लखनऊ जनपद में भू-उपयोग का मानचित्रण” -  लखनऊ में  8-9 नवंबर, 2014 को आयोजित “वृहद पैमाने पर मानचित्रण व इसका देश के सामाजिक – आर्थिक विकास पर प्रभाव” विषय पर राष्ट्रीय सेमीनार में प्रस्तुत  |
  • संदीप के. सिंह, ए.के. श्रीवास्तव व डा. आर.के. उपाध्याय – “अन्तरिक्ष जनित तकनीक का प्रयोग करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश (भारत) में  कृषि पद्धति में स्थानिक परिवर्तन की निगरानी” - लखनऊ में  8-9 नवंबर, 2014 को आयोजित “वृहद पैमाने पर मानचित्रण व इसका देश के सामाजिक – आर्थिक विकास पर प्रभाव” विषय पर राष्ट्रीय सेमीनार में प्रस्तुत  |
  • संदीप के. सिंह, ए.के. श्रीवास्तव तथा डा॰ आर.के.उपाध्याय  - “अन्तरिक्ष जनित तकनीक का प्रयोग करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश (भारत) में फसलों की पद्धति में स्थानिक परिवर्तन की निगरानी” - लखनऊ में  8-9 नवंबर, 2014 को आयोजित “वृहद पैमाने पर मानचित्रण व इसका देश के सामाजिक – आर्थिक विकास पर प्रभाव” विषय पर राष्ट्रीय सेमीनार में प्रस्तुत  |
  •  मनु मेहता, वैशाली शर्मा, आर.के.उपाध्याय (2016) - “
    उत्तर भारत में हाल ही में धूल भरी घटना के दौरान एरोसोल ऑप्टिकल गहराई विविधता” – “जल, पर्यावरण अभियांत्रिकी व समाज पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन” में प्रस्तुत (आई सी डब्ल्यू ई ई एस-2016) 
  • आरिफ़ अहमद, आर. के. उपाध्याय, बी. लाल व धनंजय सिंह (2016) – “रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस तकनीक का प्रयोग करते हुए रायबरेली जनपद में सोडियम प्रभावित भूमि के परिवर्तन का पता लगाना” – “जल, पर्यावरण अभियांत्रिकी व समाज पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन” में प्रस्तुत (आई सी डब्ल्यू ई ई एस-2016) 
  • आर. के. उपाध्याय, योगेश कुमार, उदय राज, नरेंद्र कुमार, पी. सी. गुप्ता व ए. एन. सिंह “ उत्तर प्रदेश के हरदोई, व लखनऊ जनपदों के भागों में विभिन्न आयु समूहों में आम के बगीचों के क्षेत्रों का आंकलन” 11-13 दिसम्बर, 2001 को अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन आईएसआरएस में प्रस्तुत |
  • एम. एस. यादव, धर्मेश वर्मा, ए.एन. सिंह, नरेंद्र कुमार, योगेश कुमार  व आलोक माथुर (2001) – “जीआईएस वातावरण में उच्च रेज़ोल्यूशन वाला उपग्रह डाटा प्रयोग करते हुए सोडियम प्रभावित भूमि सुधार की कैडेस्ट्रल स्तर पर निगरानी करना” 11-13 दिसम्बर, 2001 को अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन आईएसआरएस में प्रस्तुत
  •   नरेंद्र कुमार, अरविंद त्रिपाठी, एस. के. साहा, उदय राज, पी.सी. गुप्ता तथा ए.एन. सिंह (2002) – “रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस का प्रयोग करते हुए आमों के बगीचों के लिए भूमि के मूल्यांकन का विश्लेषण” -  दिनांक 03-06 दिसम्बर, 2002 को हैदराबाद में सम्पन्न हुए आईएसपीआरएस सम्मेलन में प्रस्तुत
  • योगेश कुमार सिंह, ए. एन. सिंह, पी.सी. गुप्ता तथा नरेंद्र कुमार (2002) -  “ आई आर एस-1डी पैन डाटा का प्रयोग करते हुए  विभिन्न आयु वर्गों में आमों के बगीचों का चित्रण” - दिनांक 03-06 दिसम्बर, 2002 को हैदराबाद में सम्पन्न हुए आईएसपीआरएस सम्मेलन में प्रस्तुत
  • एस.पी. व्यास, एम.पी. ओज़ा, वी.के. दध्वाल, योगेश कुमार, आर.के. उपाध्याय, नरेंद्र कुमार, व पी.सी.गुप्ता (2003) -  “आईआरएस एलआईएसएस –III डाटा का प्रयोग करते हुए आगरा जनपद की दो तहसीलों में बहु फसलों में प्रथकत्व पर अध्ययन” -  थिरुवनंथापुरम, भारता में  2003 में आयोजित “एकीकृत निगरानी प्रणाली” पर आई एस पी आर एस डब्ल्यूजी vii/3 कार्यशाला में प्रकाशित
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, एस.पी.एस. जादौन, राजेश उपाध्याय, अमित सिन्हा, तथा अंजनी कुमार टांगड़ी – “ बहु दिवसीय उपग्रह डाटा का प्रयोग करते हुए आगरा नगर के शहरी फैलाव की निगरानी” -  प्रस्तुतिकरण का स्थान – जे पी पैलेस होटल, आगरा, 18-19 अक्तूबर, 2004
  •  “एशिया के बड़े नगरों में शहरी सुरक्षा हेतु नवीन प्रौद्योगिकी” | सिविल अभियांत्रिकी, आई आई टी कानपुर, शारी सुरक्षा अभियांत्रिकी का अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, व औद्योगिक विज्ञान विश्व विद्यालय, टोक्यो जापान द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित |
  • अश्वनी के. श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, आर.के. उपाध्याय, एस पी एस जादौन तथा वीरेंद्र कुमार – “ रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के बड़े नगरों में शहरी विकास के स्तर का अध्ययन” -  गोआ में 27-30 सितम्बर, 2006 को सम्पन्न हुए सतत विकास हेतु भू-स्थानिक डाटाबेस पर आईएसपीआरएस  तकनीकी आयोग-iv  सम्मेलन तथा आईएसआरएस वार्षिक सम्मेलन में प्रस्तुत |
  •  अश्वनी के. श्रीवास्तव, विभु सरीन, आर.के.उपाध्याय, अमित सिन्हा, सुधाकर शुक्ला, एसपी एस जादौन तथा वीरेंद्र कुमार – “ रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों के फैलाव का एक आंकलन” – हैदराबाद में 22-25 जनवरी, 2007 को सम्पन्न हुए मैप फोरम वर्ल्ड में प्रस्तुत |
  •  ए. उनियाल, पी.एन. शाह, आर. अग्रवाल, वी.कुमार उपाध्याय, एम. वाधोद्कर, एस पी एस जादौन, एस. शुक्ला तथा पी.के. गोस्वामी (2010) – “ उच्च रेज़ोल्यूशन पॉइंट जियोकोडेड पैन डाटा तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए मसूरी के थत्यूर व धनौलती स्थानों पर भूस्खलन के ख़तरों का क्षेत्रीयकरण” – भारतीय भूस्खलन , वॉल्यूम-3 संख्या-2, 2007 पृष्ठ 7-18 ( राष्ट्रीय सूचना प्रबंधन संस्थान, शिलोंग द्वारा प्रकाशित)
  •  एस शुक्ला, एस पी एस जादौन, ए के श्रीवास्तव, पी एन शाह तथा के राजराजन (2008) – “रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी की सहायता से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र में मालपागढ़ घाटी के अहिमाच्छादित भाग में भूस्खलन के खतरों का विस्तृत क्षेत्रीयकरण” – “हिमालय में हिमनद भू-आकृति-विज्ञान तथा प्राचीन हिमाच्छादन”  पर राष्ट्रीय सेमिनार की कार्यवाही में प्रस्तुत शोध पत्र | सीएएसजी , लखनऊ विश्वविद्यालय, द्वारा 13-14 मार्च, 2008 को प्रकाशित, पृष्ठ संख्या – 75-76 |
  •  अश्वनी के. श्रीवास्तव, अमित सिन्हा, वी. सरीन, आर.के. उपाध्याय, एस.पी.एस. जादौन, पी.एन. शाह (2008) – “रिमोट सेन्सिंग प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग द्वारा सिद्धार्थनगर जनपद में भू-उपयोग/लैंड कवर मानचित्रण” – नेशनल पी जी कॉलेज, भूगोल विभाग, लखनऊ द्वारा 06-07 मार्च, 2008 को आयोजित “भू-उपयोग , लैंड कवर परिवर्तन व कृषि जैव विविधता” पर एब्स्ट्रैक्ट अंतराष्ट्रीय सेमिनार की कार्यवाही में प्रकाशित – पृष्ठ 13 |
  • पी. एन. शाह, ए. उनियाल. वी. कुमार, एस.पी.एस. जादौन, रामाचन्द्रा तथा पी. के. गोस्वामी  (2010) – “ अल्मोड़ा व नैनीताल जनपदों के भागों में रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी की सहायता से  भूस्खलन उत्पन्न होने के खतरों का क्षेत्रीयकरण व प्रबंधन मानचित्रण” – “बीरबल साहनी पुरावनस्पतिशास्त्र संस्थान, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)  द्वारा आयोजित प्रथम भारतीय भूस्खलन कांग्रेस में प्रस्तुत शोध पत्र” 
  • वीरेंद्र कुमार, एस.पी.एस. जादौन तथा अश्वनी के. श्रीवास्तव (2010) – “उत्तर  प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस के अनुप्रयोग द्वारा भू-उपयोग व लैंड कवर का मानचित्रण” – उत्तर प्रदेश टेकनो फ़ेम, पृष्ठ 59-64, वॉल्यूम-1 (2010) में प्रकाशित |
  • पी.एन.शाह, ए. उनियाल, पी. के. गोस्वामी, वी. कुमार, एस.पी.एस. जादौन तथा रामचंद्रा (2012) “कुमाऊँ हिमालय क्षेत्र के अल्मोड़ा व नैनीताल जनपदों के भागों में रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी की सहायता से  भूस्खलन उत्पन्न होने के खतरों का क्षेत्रीयकरण व प्रबंधन अध्ययन”  भारतीय भूस्खलन, वॉल्यूम 5, संख्या-1 , 2012 पृष्ठ- 23-24 (राष्ट्रीय सूचना प्रबंधन संस्थान, शिलोंग द्वारा प्रकाशित)
  • वीरेन्द्र कुमार, कमलेश भालावी, गौरव सोनी, भावना, राजीव मोहन तथा एस.पी.एस. जादौन – “उच्च रेज़ोल्यूशन वाले रिमोट सेन्सिंग तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में शहरी भू-उपयोग नियामक क्षेत्र का मानचित्रण”  - जेएयूटीएस, वॉल्यूम 2, इश्यू 1 व 2, जून व दिसंबर, पृष्ठ 14-22, आईएसएसएन -2395-4361(पी)
  • एस.पी.एस. जादौन, आर.के. उपाध्याय, बंदना सिंह चंदेल तथा धीरज कुमार द्विवेदी – “  रिमोट सेंसिंग और जी.आई.एस. प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए  कृषि उत्पादन के लिए वाटरशेड की प्राथमिकता और परिशोधन पर एक अध्याय।  - प्रोफ़ेसर आर.एन. तिवारी, विभागाध्यक्ष भूगोल विभाग, राजकीय परास्नातक विज्ञान कॉलेज रींवाँ, मध्य प्रदेश द्वारा द्वारा संपादित “भूजल पर एक पुस्तक”  में प्रकाशित, फ़रवरी 05-2016
  • उदय राज, जे. प्रसाद, आर.ए. पाठक तथा आर.के. पाठक (2005) – “ पपीते की पत्तियों पर परा बैंगनी विकिरण में परिवर्तन की प्रतिक्रिया” (सी पपीता एल.) औद्यानिकी के भारतीय जर्नल को प्रकाशनार्थ भेजा गया |
  •  ए. कुमार, आर.बी.राम, एम.एल. मीणा, यू. राज तथा ए.के. आनंद (2014) – “जैविक उर्वरकों का ग्राफ़टेड प्लांट आंवला की आकृति विज्ञान संबंधी विशेषताओं पर प्रभाव”  - होर्ट फ्लोरा रिसर्च स्पेक्ट्रम, 3 (1) : 97-99 |
  •  ए. कुमार, आर.बी. राम, एम.एल. मीणा,  यू. राज तथा ए.के. आनंद  (2014) – “आंवला अंकुरण व ग्राफ़टेड प्लांट्स की पोषण विशेषताओं पर जैव उर्वरकों का प्रभाव” – विज्ञान व प्रकृति पर अंतर्राष्ट्रीय जर्नल-5 (2) पृष्ठ 258-260 पर प्रकाशित |
  •  ए. कुमार, आर.बी.राम, एम.एल. मीणा, यू. राज तथा ए.के. आनंद (2014) – “जैविक उर्वरकों का ग्राफ़टेड प्लांट आंवला की आकृति विज्ञान संबंधी विशेषताओं पर प्रभाव”  - पर्यावरण व पारिस्थितिकी 32 (4ए) : पृष्ठ संख्या -1502-1505  पर प्रकाशित
  • ए. कुमार, आर.बी.राम, एम.एल. मीणा, यू. राज तथा ए.के. आनंद (2014) – “भारत की उप-ऊष्ण कटिबंधीय स्थितियों में कली युक्त आंवला पौधों के फ़ेनोलोजिकल लक्षणों पर जैव उर्वरकों का प्रभाव” -  यूरोपियन आकादमिक शोध -2 (6) : पृष्ठ 7784-7789 पर प्रकाशित |
  •  उदय राज, पी.सी. गुप्ता, डी. सिंह, आर.पी. मौर्य तथा एस. त्रिवेदी (2015) – “रिमोट सेंसिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए  उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में प्लॉट स्तर पर औदयानिक फसलों के क्षेत्र का आंकलन व मानचित्रण” – उच्च तकनीकी औद्यानिकी पर राष्ट्रीय सेमिनार,  चुनौतियाँ तथा अवसर, 26-27 फरवरी, 2015 पृष्ठ-209 पर प्रकाशित
  •   उदय राज, दिलीप कुमार तथा पी.सी. गुप्ता (2016) – “ग्राम्य स्तर पर रिमोट सेन्सिंग आधारित फ़सल क्षेत्र आंकलन की कार्यप्रणाली” – “सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर अंतराष्ट्रीय सम्मेलन – विज्ञान से प्रयोग की ओर (एस एन आर एम एस पी), 12-13 जनवरी, 2017 पृष्ठ 165-166 पर प्रकाशित |
  •  उदय राज, जे. प्रसाद, आर.ए. पाठक तथा आर.के. पाठक (2016) – “पपीते में परा बैंगनी विकिरण का मोर्फ़ो फ़िजियोलोजिकल लक्षणों पर प्रभाव” -“सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर अंतराष्ट्रीय सम्मेलन – विज्ञान से प्रयोग की ओर (एसएनआरएमएसपी), 12-13 जनवरी, 2017 पृष्ठ 166 -167 पर प्रकाशित |
  • एम.एस. यादव, पी.पी.एस. यादव, मनीष यदुवंशी, धर्मेश वर्मा – “ रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए सोडियम प्रभावित भूमि सुधार की सततता का आंकलन” – पर्यावरण नियोजन मानचित्र भारत-2005, नई दिल्ली से प्रकाशित
  •  एम.एस. यादव, पी.पी.एस. यादव, मनीष यदुवंशी, धर्मेश वर्मा, ए।एन. सिंह – “– “ रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए सोडियम प्रभावित भूमि सुधार की सततता का आंकलन” – इंडियन सोसाइटी ऑफ रिमोट सेन्सिंग 38: प्रष्ठ 269 – 278 पर प्रकाशित
  •  पी.पी.एस. यादव, कौशलेंद्र सिंह, बी. लाल, आलोक माथुर, पी.सी. गुप्ता, ए.एन. सिंह (2015) – “ बेहतर भू-उपयोग नियोजन हेतु खादर भूमि सुधार/स्थिरता आंकलन के लिए मध्यम व उच्च रेज़ोल्यूशन उपग्रह डाटा का मूल्यांकन”  -  “भू संसाधनों के सतत विकास हेतु भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी तथा 3डी अनुप्रयोग पर राष्ट्रीय सम्मेलन” (10)
  •  दिलीप कुमार, बी. एस. खेरावत, पी.पी. सिंह यादव, मुन्नालाल, राजेश कुमार उपाध्याय तथा सुशील कुमार (2012) – “रिमोट सेन्सिंग व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के भागों में बाघिन नदी की मोडेलिंग व निगरानी”  - एशियन जर्नल ऑफ सॉइल साइंस 7 (2) : पृष्ठ 392-395 पर प्रकाशित |
  • पी.पी.एस. यादव, अर्जुन सिंह, जी. राजपूत तथा के. सिंह (2016) – “ उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद के भागों में आईआरएस एलआईएसएस –IV तथा कार्टोसेट -1 मर्ज्ड डाटा का प्रयोग करते हुए सतत भूमि व फ़सल प्रबंधन” – “ऐग्रोपैडोलोजी  (दिसंबर) संस्करण में प्रकाशित |
  •  प्रगति सिंह, करुणा यादव तथा आर.के.उपाध्याय ; (2018) – उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद में धान की पैदावार पर वर्षा का प्रभाव”
  • प्रगति सिंह, करुणा यादव तथा आर.के.उपाध्याय ; (2018)- “उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में तेंदू पत्ता के उत्पादन पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव”
  • रिया मेहरोत्रा, प्रगति सिंह, आर.के. उपाध्याय, के.पी. राव तथा पी.के. शुक्ला (2018) – “सीडब्ल्यूएसआई तथा टीडब्ल्यूएसआई के मध्य, उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद हेतु गेहूं की सिंचाई कार्यक्रम हेतु लैंड सैट 8, ओएलआई+टी एल आर एस डाटा का प्रयोग करते हुए, तुलनात्मक अध्ययन |
  • प्रगति सिंह, आर.के.उपाध्याय, हीरेन पी. भट्ट, मार्कण्ड पी. ओज़ा तथा एस.पी.व्यास (2018)  - “उत्तर प्रदेश की फ़सल उपयुक्तता विश्लेषण”
  •   प्रमोद कुमार यादव, प्रगति सिंह, नरेंद्र कुमार, एस.पी.एस. जादौन तथा आर.के. उपाध्याय (2018) – “उत्तर प्रदेश में 23-डाउन हैदरगढ़ नहर नियंत्रण प्रणाली में नहर के पुनर्गठन का कृषि भूमि उपयोग पर प्रभाव”
  •  सुनील यादव, प्रगति सिंह, एस.पी.एस. जादौन, नरेंद्र कुमार तथा आर.के.उपाध्याय (2018) – “उत्तर प्रदेश के ललितपुर जनपद में लैंडसैट व सेंटीनल डाटा का प्रयोग करते हुए मृदा में नमी का विश्लेषण” 
  •  धनंजय सिंह, वैशाली शर्मा, आशुतोष सिंह, आर.के. उपाध्याय, नरेंद्र कुमार व एस.पी.एस. जादौन (2018) – “रिमोट सेन्सिंग व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के निचली गंगा नहर नियंत्रण प्रणाली में नहर की लाइनिंग करने का फ़सल के क्षेत्रफल पर प्रभाव”
  • हर्षिता सिंह, वैशाली शर्मा तथा आर. के. उपाध्याय (2018) – “उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में लैंडसैट तथा उपग्रहीय डाटा का प्रयोग करते हुए भू सतह तापमान में परिवर्तन का अनुमान