भौगोलिक-स्थानिक डाटा बैंक विभाग

भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का संबंध डाटा के संकलन या प्रसंस्करण से है जो स्थानों से संबन्धित है | भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी संदर्भ का प्रयोग आधुनिक उपकरणों, जो भौगोलिक मानचित्रण, धरती और मानव समाज के विश्लेषण में सहयोग कर रहे हैं, की रेंज का वर्णन करने हेतु किया जाता है | भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी स्वयं में सुदूर संवेदन व उपग्रह डाटा के कई क्षेत्र समेटे है तथा इनकी क्षमता के अनुप्रयोग को ज्ञानाधार पैदा करने तथा हमारे जीवन की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु सूचना का आदान प्रदान करने में प्रयोग किया जाता है | भू-स्थानिक डाटा की क्षमता का दोहन करने हेतु, उपकरणों के विकास व उनके शक्तिवर्धन, प्रौद्योगिकी व कुशल विशेषज्ञता के साथ ही डिजिटल प्रारूप में सूचनाओं के आउटपुट को धरातलीय स्तर पर उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने पर प्रमुखता से बल दिया जाता है |

संसाधन/उपलब्ध सुविधाएं :-

  • एक डाटा बैंक जिसमें विभिन्न  प्रकार के मानचित्र, स्थलाकृतिक शीट्स सहित, हवाई चित्र तथा उपग्रह डाटा संकलित है, जिसका प्रयोग केंद्र की स्थापना के समय से ही विभिन्न परियोजनाओं में किया जाता रहा है |
  • विभिन्न पूरी हुई परियोजनाओं से प्राप्त डिजिटल डाटाबेस |
  • विभिन्न उपयोगकर्ता विभागों (सरकारी/निजी/शिक्षण संस्थानों) को उनकी आवश्यकतानुसार समानुपातिक आधार पर निर्धारित प्रारूप में डाटा प्रदान करना |
  • भू-स्थानिक डाटा प्रभाग आरएसएसी-यूपी तथा एनआरएससी हैदराबाद के वैज्ञानिकों के मध्य राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उपग्रहों से अन्तरिक्ष जनित डाटा प्राप्त करने हेतु एक इंटरफेस की तरह काम कर रहा है | 

भविष्य के अध्ययन हेतु निम्नलिखित प्रबल क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है :-

  • उत्तर प्रदेश की मरणासन्न नदियों का पुनः प्रवर्तन
  •  सिंधु गंगा के मैदानों में पालियो हाइड्रोलोजिकल अध्ययन
  • हिमनदों की उभरती हुई घटनाएँ तथा हिमनद झील के हिमालय में बाढ़ के कारण फटने की निगरानी

श्री राम चंद्रा

श्री राम चंद्रा
पदनाम वैज्ञानिक – एसई व प्रमुख भू-स्थानिक डाटा प्रभाग
शैक्षिक योग्यता : एम.एस.सी. भूगर्भशास्त्र सुदूर संवेदन में पी.जी. डिप्लोमा
विशेषज्ञता
  • सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा ग्लेशिओलोजिकल अध्ययन 
  • सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी के द्वारा नदियों का गतिकी अध्ययन .
  • सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा भूजल संभावना मानचित्रण अध्ययन
  • सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा भूस्खलन के खतरों वाले क्षेत्रों का मानचित्रण  
  • सुदूर संवेदन व जी आई एस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण का अध्ययन
  • सुदूर संवेदन व जी आई एस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा बुनियादी ढांचे के मानचित्रण का अध्ययन
अनुभव 31 वर्ष
प्रकाशन की संख्या शोधपत्र - 41
तकनीकि रिपोर्ट - 42
एटलस- 04
संपर्क 09451953449, 08765977662
ई-मेल vermarc40@gmail.comvermarc45@yahoo.com
केंद्र का डाटा बैंक सर्वे ऑफ इंडिया के स्थलाकृतिक मानचित्रों के रूप में प्राथमिक डाटा का संग्रह है जिसे आधारभूत सूचना तैयार करने हेतु प्रयोग किया जाता है, जबकि हवाई चित्रों व अन्तरिक्ष जनित डाटा का प्रयोग सूचनाओं के द्वितीयक स्रोत के रूप में विषयगत लेयर्स उत्पन्न करने में किया जाता है, यह केंद्र की बहुत सी वैज्ञानिक परियोजनाओं हेतु बहुत आवश्यक है | अनेकों परियोजनाओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए केंद्र की स्थापना के समय से ही एक डाटा बैंक की स्थापना की गई थी | यह डाटा बैंक 11517, हार्ड कॉपी के रूप में, एसओआई–स्थलाकृतिक शीट्स, जिसमें 335 डिजिटल स्थलाकृतिक मानचित्र, लगभग 39170 हवाई चित्र साथ ही साथ (एफ़सीसी – 5767, डिजिटल डीवीडी 3741 डाटा) तथा लगभग 9508 उपग्रह डाटा का संग्रह है |
  • भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मृतप्राय: हिंडन नदी का उच्चीकरण व पुन: प्रवर्तन  (उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित परियोजना)
  •  उत्तराखंड, हिमालय के चमोली जनपद में सतोपंथ-भागीरथ खड़क हिमनदों की दीर्घावधि निगरानी (डीएसटी –जीओआई प्रायोजित परियोजना)
  • पंचायती राज संस्थानों को स्थानिक रूप से सशक्त बनाना (ईपीआरआईएस) – एनआरएससी, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित परियोजना
  • एनआरएससी –एलयूएलसी परियोजना – 50 के मानचित्रण – पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 34 जनपदों हेतु तृतीय चक्रीय परियोजना – एनआरएससी, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित

पूर्ण परियोजनाएँ

हिमालय में ग्लेशियोलोजिकल अन्वेषण

हाल ही में पूर्ण हुई वैज्ञानिक परियोजनाएं

  • उत्तराखंड, हिमालय के चमोली जनपद में सतोपनाथ-भागीरथ खड़क हिमनदों की दीर्घावधि निगरानी डी एस टी हिमनद परियोजना)
  • हिमालय क्षेत्र में फ़ेज़ –ii में बर्फ़ व हिमनदों की निगरानी (एसएसी, आईएसआरओ परियोजना)

पूर्ण वैज्ञानिक परियोजनाएं :

  • ऑप्टिकल सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी की सहायता से बढ़ते हुए हिमनदों की गतिकी की निगरानी – (डीएसटी – बढ़ते हुए हिमनदों की परियोजना)
  • उत्तराखंड, हिमालय में गंगोत्री, सतोपंथ – भागीरथ खड़क हिमनदों के हिमाच्छादन में विविधता का ऑप्टिकल व माइक्रोवेव सुदूर संवेदन द्वारा अध्ययन – बर्फ़ की श्रेणी में विविधता तथा उनसे निकलने वाली नदियों पर उसके प्रभाव के मापन का एक प्रयास (डीएसटी – गंगोत्री-सतोपंथ हिमनद परियोजना)
  • भारतीय हिमालय क्षेत्र में उपग्रह सुदूर संवेदन के माध्यम से हिमाच्छादन के स्थानिक व फैलाव में विविधता की निगरानी” – (डी एस टी – हिमाच्छादन परियोजना)
  • “उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में हिमाच्छादन में विविधता की निगरानी में सुदूर संवेदन की भूमिका”  - हिमनदीय जल विज्ञान पर इसके प्रभाव का आकलन और पिघले पानी के परिणामस्वरूप वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया (डी एस टी – गंगोत्री हिमनद परियोजना फेज-II )
  • हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-यूएनडीपी परियोजना)
  • हिमाच्छादन में विभिन्नता का आंकलन, बर्फ़ की श्रेणी में अंतर तथा हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों के एक भाग में इलाके की विशेषताएँ – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस तकनीक का प्रयोग करते हुए संभव तथा सुलभ गलियारों को चिन्हित करने का एक प्रयास  (एसएएसई, डीआरडीओ परियोजना) 
  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे  (यूपीडा – उत्तर प्रदेश सरकार की परियोजना)
  • उत्तर प्रदेश राज्य की प्रमुख नदियों में गाद भरने की दर की स्थानिक निगरानी तथा रिमोट सेंसिंग व  जीआईएस तकनीकों का उपयोग करके बाढ़ की घटनाओं के प्रेरक कारक को कम करने हेतु रणनीतियां लागू करने का प्रयास (शारदा तथा घाघरा नदी बेसिन परियोजना, उत्तर प्रदेश सरकार की परियोजना)
  • रिमोट सेंसिग तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में शारदा नदी की गतिकी की निगरानी, बाढ़ स्थिति तथा भू-अभियांत्रिकी का आंकलन” (सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार की परियोजना)
  • उत्तरांचल हिमालय के विष्णु प्रयाग में अलकनंदा नदी बेसिन के ऊपरी भाग में बर्फ़ के पिघलने का सुदूर संवेदन  डाटा
  • उत्तरांचल हिमालय में सुदूर संवेदन डाटा तथा परंपरागत प्रणालियों का एकीकरण कर भागीरथी नदी घाटी में बर्फ़ के पिघलने का अध्ययन
  • उत्तरकाशी जनपद उत्तराखंड में भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुग्याल क्षेत्र में हिमाच्छादन व इलाके की  विशेषताओं के आंकलन हेतु सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रयोग – ड्यारा बुग्याल क्षेत्र को शीतकालीन क्रीड़ा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने हेतु संभावना का आंकलन करता हुआ अध्ययन
 

पूर्ण हो चुकी वैज्ञानिक परियोजनाएं :

  • ऑप्टिकल सुदूर संवेदन व जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए भारतीय हिमालय में बढ़ते हुए हिमनदों की गतिकी की निगरानी
  • उत्तराखंड, हिमालय में गंगोत्री, सतोपंथ – भागीरथ खड़क हिमनदों के हिमाच्छादन में विविधता का ऑप्टिकल व माइक्रोवेव सुदूर संवेदन द्वारा अध्ययन – बर्फ़ की श्रेणी में विविधता तथा उनसे निकलने वाली नदियों पर उसके प्रभाव के मापन का एक प्रयास
  • उपग्रह सुदूर संवेदन के माध्यम से भारतीय हिमालय में हिमाच्छादन के स्थानिकीकरण व फैलाव में  विविधता की निगरानी
  • उत्तराखंड हिमालय के गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में हिमाच्छादन में विविधता की निगरानी में सुदूर संवेदन की भूमिका - ग्लेशियल जलविज्ञान और परिणामस्वरूप पिघले पानी की वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया पर इसका प्रभाव आंकलित करने हेतु एक प्रयास
  • हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
  • हिमाच्छादन में विभिन्नता का आंकलन, बर्फ़ की श्रेणी में अंतर तथा हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों के एक भाग में इलाके की विशेषताएँ – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस तकनीक का प्रयोग करते हुए संभव तथा सुलभ गलियारों को चिन्हित करने का एक प्रयास 
  • उत्तराखंड, हिमालय में भागीरथी बेसिन में सुदूर संवेदन व जीआई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए ग्लेशियल इनवेंटरी
  • उत्तरकाशी जनपद उत्तराखंड में भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुग्याल क्षेत्र में हिमाच्छादन व इलाके की  विशेषताओं के आंकलन हेतु सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रयोग – ड्यारा बुग्याल क्षेत्र को शीतकालीन क्रीड़ा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने हेतु संभावना का आंकलन करता हुआ अध्ययन

उत्तरांचल में कुमाऊँ तथा गढ़वाल के भूस्खलन के खतरों वाले क्षेत्रों का मानचित्रण

  • उत्तराखंड, कुमाऊँ के नैनीताल जनपद में भूस्खलन के खतरों वाले क्षेत्रों का मानचित्रण- उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद गढ़वाल में गंगनानी- पुराली-गंगोत्री-गोमुख तीर्थयात्रा मार्ग  पर भूस्खलन खतरों के क्षेत्र/संदिग्ध क्षेत्रों का मानचित्रण
  • उत्तराखंड के कुमाऊँ हिमालय क्षेत्र में भूस्खलन के खतरों वाले क्षेत्रों का मानचित्रण

बिहार तथा उत्तर प्रदेश के विशाल क्षेत्र में फैले गंगा के मैदानों में नदी संबंधी अध्ययन

  • रिमोट सेंसिग तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में शारदा नदी की गतिकी की निगरानी, बाढ़ स्थिति तथा भू-अभियांत्रिकी का आंकलन
  • उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों में गाद भरने तथा पर्यावरणीय पतन का आंकलन – प्रेरण कारकों तथा रणनीतियों को समझने का एक प्रयास
  • उपग्रह चित्रावली के माध्यम से गंगा नदी के व्यवहार को समझने का प्रयत्न तथा पटना, बिहार में प्रस्तावित रेल पुल
  • गंगा नदी में तलछट के भार की स्थानिक निगरानी तथा बाढ़ की स्थिति का आंकलन

मध्य प्रदेश में भूजल संभावनाओं का मानचित्रण

  • मध्य प्रदेश के रायसेन जनपद में राजीव गांधी राष्ट्रीय पेय जल मिशन का भू जल संभावना मानचित्रण में प्रयोग

एकीकृत प्राकृतिक संसाधन अध्ययन

  • उत्तराखंड के चमोली जनपद में डाटा बेस जनरेशन व नियोजन हेतु जीआईएस आधारित सतत विकास सूचना प्रणाली

राष्ट्रीय (प्राकृतिक) संसाधन सूचना प्रणाली

  • कानपुर देहात जनपद का हाइड्रोजिओमोर्फोलोजिकल मानचित्रण
  • कानपुर नगर जनपद का हाइड्रोजिओमोर्फोलोजिकल मानचित्रण

गत वर्षों में पूर्ण हुई ग्लेशिओलोजी परियोजनाएं

  • उत्तरांचल हिमालय के विष्णु प्रयाग में अलकनंदा नदी घाटी के ऊपर की ओर बर्फ़ के पिघलने का सुदूर संवेदन अध्ययन
  • उत्तरांचल हिमालय में सुदूर संवेदन डाटा तथा परंपरागत प्रणालियों का एकीकरण कर भागीरथी नदी घाटी में बर्फ़ के पिघलने का अध्ययन
  • उत्तरकाशी जनपद उत्तराखंड में भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुग्याल क्षेत्र में हिमाच्छादन व इलाके की  विशेषताओं के आंकलन हेतु सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रयोग – ड्यारा बुग्याल क्षेत्र को शीतकालीन क्रीड़ा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने हेतु संभावना का आंकलन करता हुआ अध्ययन
  • हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
  • उत्तराखंड हिमालय के गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में हिमाच्छादन में विविधता की निगरानी में सुदूर संवेदन की भूमिका - ग्लेशियल जलविज्ञान और परिणामस्वरूप पिघले पानी की वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया पर इसका प्रभाव आंकलित करने हेतु एक प्रयास
  • हिमाच्छादन में विभिन्नता का आंकलन, बर्फ़ की श्रेणी में अंतर तथा हिमालय के हिमाच्छादित क्षेत्रों के एक भाग में इलाके की विशेषताएँ – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए संभव तथा सुलभ गलियारों को चिन्हित करने का एक प्रयास  -
    • खनन गतिविधियों का प्रभाव तथा पर्यावरण पर सुपर थर्मल पावर स्टेशन (देहरादून मसूरी खनन पट्टी क्षेत्र)
    • उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद में मौदहा बांध जलग्रहण क्षेत्र व कमांड क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव का आंकलन
    • पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जनपदों में कृषि –पूर्व गेहूं के क्षेत्र का आंकलन (रबी 1989-90) 
    • लैंड सैट डाटा का प्रयोग करते हुए टिहरी बांध जल ग्रहण क्षेत्र में भूमि क्षरण व वन पतन आंकलन  
    • उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर व सोनभद्र जनपद में बंजर भूमि का मान चित्रण
    • उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में वनाच्छादन का मानचित्रण
    • सतत विकास हेतु एकीकृत मिशन (आईएमएसडी)
    • राष्ट्रीय (प्राकृतिक) संसाधन सूचना प्रणाली (एनआरआईएस)
    •  उत्तर प्रदेश में सोडियम प्रभावित भूमि सुधार( पुष्प तथा पशु विविधता व सुधार के पांचवें वर्ष में सोडियम युक्त मृदा के कुछ क्षेत्रों में माइक्रोबियल बायोमास)
    • उत्तर प्रदेश के विंध्य क्षेत्र व तराई क्षेत्र में वनों की निगरानी व आंकलन
    • सोनभद्र में जी आई एस पायलट स्टडी
    • राष्ट्रीय बंजर भूमि इनवेंटरी व आंकलन (एनडब्ल्यूआईए)
    • वन मात्रा मानचित्रण व मात्रा आंकलन (एफएसएमवीई)
    • वन भूमि में आवासीकरण का चिन्हीकरण (आईएफएचएल)
    •  डाला सीमेंट फैक्ट्री, डाला सोनभद्र जनपद के लिए खनन की पट्टे पर दी जाने वाली छे साइट्स की पर्यावरणीय दशाओं का आंकलन करने हेतु डिजिटल डाटाबेस तैयार करना |
    • विकेंद्रीकृत नियोजन हेतु अन्तरिक्ष आधारित सूचना सपोर्ट (एस आई एस- डी पी) – एनआरएससी, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित परियोजना (2011-2016) 
    • एन आर एस सी –एल यू एल सी परियोजना -50 हज़ार मानचित्रण – द्वितीय साइकिल एनआरएससी, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित (2011-12)
    • उत्तर प्रदेश के झीलों/पक्षी विहारों में पुष्प व पशु जैव विविधता का आंकलन, यूपीएसबीबी, लखनऊ द्वारा प्रायोजित (2013-2014)
    • उपयोगकर्ता विभाग अध्ययन – मथुरा तेलशोधन कारख़ाना हरित पट्टी मानचित्रण
    • लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के 100 मीटर बफ़र के साथ एलयूएलसी – यूपीडा परियोजना
  • राम चन्द्र (2019) - सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तराखंड हिमालय में स्थित चमोली जनपद के सतोपंथ तथा भागीरथ खड़क हिमनद क्षेत्र में हिमनदों के पिघलने पर जलवायु परिवर्तन शीलता के निर्णायक प्रभाव का आंकलन (सारांश) -  सतत विकास हेतु प्राकृतिक खतरों के आंकलन में सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी की भूमिका : वर्तमान परिदृश्य तथा भविष्य का परिपेक्ष्य – लखनऊ विश्व विद्यालय में दिनांक 15 मार्च 2019 को आयोजित – में पृष्ठ 132-133 पर प्रकाशित
  • राम चन्द्र व अन्य (2018) – भारत के कराकोरम क्षेत्र में स्थित श्योक घाटी में बढ़ते हुए हिमनदों की दीर्घकालीन निगरानी – राइमो तथा कुमदान हिमनद समूह पर की गई एक केस स्टडी - जलवायु परिवर्तन जर्नल, वॉल्यूम 4, संख्या 1(2018) में प्रकाशित
  • राम चन्द्र (2016) – शारदा-घाघरा नदी प्रणाली में गाद भरने की दर का स्थानिक-अस्थायी मानचित्रण  व निगरानी, बाढ़ के कारक कारणों के गूढ रहस्यों का पता लगाना साथ ही सुदूर संवेदन व जी आई एस प्रौद्योगिकी के माध्यम से इन कारणों को कम करने में सहायक रणनीतियाँ तैयार करना (सार) संचारित/प्रकाशित – सुदूर संवेदन व जी आई एस के साथ पर्वत पर्यावरण प्रणाली पर विशेष बल देती हाल की प्रगति पर हुए राष्ट्रीय सेमिनार 7-9 दिसंबर, 2016 देहरादून पृष्ठ -533 पर प्रकाशित
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा रूपेन्द्र सिंह (2015) – उत्तराखंड हिमालय के चमोली जनपद में ऊपरी अलकनन्दा घाटी में दो “हॉट स्पॉट” – जयपुर में 17 दिसंबर, 2015 को सम्पन्न हुई “आपदा जोखिम में कमी लाने हेतु भूस्थानिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग” कार्यशाला- सार का संबन्धित कारक – आईएसपीआर एसडब्ल्यूजी  VIII/I , पृष्ठ-32 पर प्रकाशित
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा रूपेन्द्र सिंह (2014) – “उत्तराखंड हिमालय के चमोली जनपद के ऊपरी अलकनंदा घाटी में स्थित सतोपंथ व भागीरथ खड़क हिमनदों के क्षय होते स्वास्थ्य की परंपरागत तथा सुदूर संवेदन तकनीक की सहायता से दीर्घावधि निगरानी”  शिमला में, 30-31 अक्तूबर, 2014 को  आयोजित डीएसटी –जीओआई, नई दिल्ली तथा जलवायु परिवर्तन पर एचपी स्टेट सेंटर, विज्ञान, प्रौद्योगिकी  तथा पर्यावरण पर राज्य परिषद  द्वारा होस्ट  हिमालयन ग्लेशिओलोजी पर राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसीएचजी-2104),  में पृष्ठ 73-75 पर प्रकाशित
  •  रूपेन्द्र सिंह, राम चन्द्र तथा ए. के. टांगड़ी (2014) – पूर्वी कराकोरम हिमालय में ऊपरी श्योक घाटी में बढ़ते हिमनद”- सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उनकी अस्थायी निगरानी करने का एक प्रयास (सार)  - अंतर्राष्ट्रीय भौगोलिक संघ (आई जी यू) आयोग  - जम्मू व काश्मीर के श्रीनगर जनपद में दिनांक 4-5 जून 2014 को सम्पन्न जियोहैज़ार्ड्स बायोडाइवर्सिटी रिसोर्स सस्टेनेबिलिटी तथा माउंटेन रिसपोन्स सम्मेलन की कार्यवाही में पृष्ठ 47 पर प्रकाशित
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा रूपेन्द्र सिंह (2014) – पूर्वी काराकोरम हिमालय – बढ़ते हुए हिमनदों का खज़ाना तथा हिमनद झील की प्रकोपी बाढ़ का अड्डा (सार) - अंतर्राष्ट्रीय भौगोलिक संघ (आई जी यू) आयोग  - जम्मू व काश्मीर के श्रीनगर जनपद में दिनांक 4-5 जून 2014 को सम्पन्न जियोहैज़ार्ड्स बायोडाइवर्सिटी रिसोर्स सस्टेनेबिलिटी तथा माउंटेन रिसपोन्स सम्मेलन की कार्यवाही में पृष्ठ 05-06 पर प्रकाशित
  •  ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र  तथा एस.के.एस. यादव (2013) – “  जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र की श्योक घाटी में काराकोरम हिमालय में बढ़ते हुए हिमनदों के लक्षण व प्रमाण”  (भू प्रणाली व आपदा प्रबंधन) – सोसाइटी ऑफ अर्थ साइंटिस्ट्स सीरीज़ 1 डीओआई 10.1007/978-3-642-28845-6_4, स्प्रिंगर – वेरलाग बर्लिन हेडेलबर्ग 2013 पृष्ठ-37-50
  • रूपेन्द्र सिंह, राम चन्द्र तथा ए.के. टांगड़ी (2012)- उत्तराखंड हिमालय के सतोपंथ व भागीरथ खड़क हिमनद का अहिमाच्छादन सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक आंकलन   - (सार) – “प्रौद्योगिकी का उच्चीकरण तथा  धरती के पर्यावरण का नीचा गिरना– सत्य अथवा मिथ्या” पर 22-24 दिसंबर, 2012 को आई जी आई, इलाहाबाद में सम्पन्न हुए भारतीय जिओफ़ोर्मोलोजिस्ट संस्थान के पच्चीसवें सम्मेलन के कार्यवृत्त में पृष्ठ 56-57 पर प्रकाशित
  • राम चन्द्र तथा ए. के. टांगड़ी (2011)- सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में स्थित श्योक घाटी के चोंग कुमदान में बढ़ते हिमनदों की गतिकी की निगरानी” (सार) लखनऊ विश्वविद्यालय के भूगर्भ के अग्रिम अध्ययन केंद्र द्वारा 16-17 फ़रवरी 2011 को  आयोजित  “हिमालयी ओजोन और वनभूमि बेसिन के दिव्य चतुर्थांश भूविज्ञान” पर संगोष्ठी के कार्यवृत्त में पृष्ठ 57-59 पर प्रकाशित
  • ए. के. टांगड़ी, एस.के.एस. यादव, राम चन्द्र दिव्या कुमारी तथा पी.एस. करमाकर (2011) – “उत्तर प्रदेश, भारत के गंगा के मैदानों में मृतप्राय नदी प्रणालियों का पुनः प्रवर्तन” – गोमती नदी की केस स्टडी (सार) - लखनऊ विश्वविद्यालय के भूगर्भ के अग्रिम अध्ययन केंद्र द्वारा 16-17 फ़रवरी 2011 को  आयोजित  “हिमालयी ओजोन और वनभूमि बेसिन के दिव्य चतुर्थांश भूविज्ञान” पर संगोष्ठी के कार्यवृत्त में पृष्ठ 55-56 पर प्रकाशित
  •  पी.ए.शाह, अनिरुध्य उनियाल, पी. के. गोस्वामी, वी. कुमार, एस.पी.एस. जादौन तथा राम चन्द्र (2010) – “ सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए कुमाऊँ हिमालय में स्थित अल्मोड़ा व नैनीताल जनपद के भागों में भूस्खलन जोखिम वाले क्षेत्रों का निर्धारण तथा प्रबंधन अध्ययन” – लखनऊ में 1-2 नवम्बर, 2019 को आयोजित  प्रथम भारतीय भूस्खलन सम्मेलन के कार्यवृत्त में प्रकाशित
  • ए.के. टांगड़ी, राम चंद्र तथा एस.के.एस. यादव (2012) – “ बढ़ते हुए हिमनद – एक अपवाद परंतु जम्मू व कश्मीर के काराकोरम हिमालय क्षेत्र की श्योक घाटी में व्यापक रूप से प्रचलित घटना” (सार) -  “भूस्थानिक प्रौद्योगिकी तथा अनुप्रयोग जिओमैट्रिक्स, 2012” पर  सीएसआरई  द्वारा आई आई टी मुंबई में 26-29 फरवरी, 2012 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय   सम्मेलन में प्रकाशित – संख्या जियो12/एसजी/294  
  • ए. के. टांगड़ी एस.के. एस. यादव तथा राम चन्द्र (2012) – “रिसोर्स सैट-1(आईआरएस–पी6) का मल्टी-डेट एडब्ल्यूआईएफएस डाटा प्रयोग करते हुए कश्मीर हिमालय के झेलम नदी बेसिन में हिमाच्छादन की विविधता की निगरानी” – भारत में झेलम नदी की जलीय क्षमता पर इसके प्रभाव का आंकलन -  (सार) -“भूस्थानिक प्रौद्योगिकी तथा अनुप्रयोग जिओमैट्रिक्स, 2012” पर  सीएसआरई  द्वारा आई आई टी मुंबई में 26-29 फरवरी, 2012 को आयोजित अंतर्राष्ट्रीय   सम्मेलन में प्रकाशित – संख्या जियो12/एसजी/291
  • ए.के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2011) – “बढ़ते ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव का आंकलन”- जम्मू और कश्मीर राज्य के कराकोरम हिमालय में श्योक घाटी की एक केस स्टडी (सार) जलवायु परिवर्तन विज्ञान तथा धरती की सततता : मुद्दे व चुनौतियाँ : लखनऊ में सितम्बर 13-14, 2011 को भारतीय भू वैज्ञानिक समाज द्वारा आयोजित “वैज्ञानिक-जनता भागीदारी” के कार्यवृत्त में पृष्ठ 07-09 पर प्रकाशित
  • ए.के. टांगड़ी तथा राम चंद्र (2009) – “हिमालयीन हिमनदों व जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आंकलन” | - “पृथ्वी प्रणाली प्रक्रिया तथा आपदा प्रबंधन” पर 15-17 सितम्बर, 2009  को सम्पन्न हुई राष्ट्रीय कान्फ्रेंस के कार्यवृत्त में पृष्ठ 10-13 पर प्रकाशित -  यह कान्फ्रेंस अंटार्कटिक व सामुद्रिक शोध हेतु राष्ट्रीय केंद्र (एनसीएओआर ) गोआ, तथा भू-वैज्ञानिक सोसाइटी द्वारा आयोजित की गई थी |   भू वैज्ञानिकों की पुस्तक शृंखला – “भू विज्ञान में उन्नतियाँ”, वॉल्यूम –I जिसे सतीश सीरियल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया था |     
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2008)- “ जम्मू और कश्मीर के कराकोरम हिमालय क्षेत्र में स्थित श्योक घाटी में बढ़ते हुए हिमनदों के प्रमाण”  - फ़र्स्ट कट रिज़ल्ट्स ( सार)   - भूगर्भशास्त्र के अग्रिम अध्ययन केंद्र लखनऊ विश्व विद्यालय, लखनऊ द्वारा 13-14 मार्च, 2008 को आयोजित “हिमालय में ग्लेशियल जिओमोर्फ़ोलोजी तथा पैलिओग्लेशियेशन के कार्यवृत्त में पृष्ठ 58-59 पर प्रकाशित
  •  ए.के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2008) – “उत्तराखंड हिमालय के गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में नियोटेक्टोनिक गतिविधियों के गूढ रहस्य का अध्ययन” (सार) - भूगर्भशास्त्र के अग्रिम अध्ययन केंद्र लखनऊ विश्व विद्यालय, लखनऊ द्वारा 13-14 मार्च, 2008 को आयोजित “हिमालय में ग्लेशियल जिओमोर्फ़ोलोजी तथा पैलिओग्लेशियेशन के कार्यवृत्त में पृष्ठ 47-48 पर प्रकाशित
  • राम चंद्र अनिल कुमार पी.एन. शाह तथा ए.एन. सिंह (2008) – “सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए भागीरथी नदी के जल ग्रहण क्षेत्र के भागों में अहिमाच्छादन के कारण भौगोलिक जोखिम” (सार)  - भूगर्भशास्त्र के अग्रिम अध्ययन केंद्र लखनऊ विश्व विद्यालय, लखनऊ द्वारा 13-14 मार्च, 2008 को आयोजित “हिमालय में ग्लेशियल जिओमोर्फ़ोलोजी तथा पैलिओग्लेशियेशन के कार्यवृत्त में पृष्ठ 66-68 पर प्रकाशित
  • राम चंद्र ए.के. टांगड़ी तथा राजीव कुमार (2007) – “उपग्रह सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी द्वारा निगरानी करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में सारदा नदी द्वारा किनारों के कटान व हानि ” – (सार)  भूगर्भशास्त्र के अग्रिम अध्ययन केंद्र लखनऊ विश्व विद्यालय, लखनऊ द्वारा 10-11 मार्च, 2008 को “सुदूर संवेदन तथा सतह” पर आयोजित राष्ट्रीय कान्फ्रेंस के कार्यवृत्त में पृष्ठ संख्या 6-7 पर प्रकाशित |
  • एस.के.एस. यादव ए.के. टांगड़ी राम चंद्र (2007) -  “मल्टीडाटा तथा उपग्रह डाटा का प्रयोग करते हुए जम्मू और कश्मीर हिमालय के झेलम नदी बेसिन में हिमाच्छादन में विभिन्नता का आंकलन” -  (सार)  - भूगर्भशास्त्र के अग्रिम अध्ययन केंद्र लखनऊ विश्व विद्यालय, लखनऊ द्वारा 10-11 मार्च, 2008 को “सुदूर संवेदन तथा सतह प्रक्रिया ” पर आयोजित राष्ट्रीय कान्फ्रेंस के कार्यवृत्त में पृष्ठ संख्या 13-14 पर प्रकाशित |
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2004) – “सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा गंगोत्री हिमनद के समाप्ति स्थल संतुलन तथा पृथककरण क्षेत्र की स्थानिक निगरानी” -  जलवायु परिवर्तन के रहस्यों को उद्घाटित करता एक प्रयास | मार्च, 2003 में गंगोत्री हिमनद पर हुई कार्यशाला की कार्यवाही – जियोलोजिकल सर्वे इंडिया स्पेशल पब्लिकेशन संख्या 80, 2004, पृष्ठ 145-153 पर प्रकाशित |
  •  ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2003) – “सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी के माध्यम से गंगोत्री हिमनद के समाप्ति स्थल, संतुलन रेखा अक्षांस तथा पृथककरण क्षेत्र की स्थानिक निगरानी” – जलवायु विविधता के रहस्यों से पर्दा उठाता एक प्रयास – भारतीय भूगभिर्क सर्वेक्षण, लखनऊ में 26-28 मार्च, 2003 को गंगोत्री हिमनद पर सम्पन्न हुई कार्यशाला  में प्रस्तुत |
  • ए.के. टांगड़ी (2003) – “हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” -  आई आई टी  दिल्ली में 27-28 जून 2003 को “जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरण” पर सम्पन्न हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत |
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2003) – “गढ़वाल हिमालय के हिमाद्रि क्षेत्र में नियो-टेक्टोनिज़्म” – ग्लेशियल स्ट्रीम मोरफोलोजी के माध्यम से रहस्योद्घाटित (सार) “29-30 जनवरी, 2003 को भूगर्भ शास्त्र विभाग, लखनऊ विश्व विद्यालय में आयोजित  हिमालयन ओरोजेन फोरलैंड संवाद पर राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत
  • ए.के. टांगड़ी (2000) – “सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए गढ़वाल हिमालय में स्थित भटवारी पश्चिम में ड्यारा बुगयाल क्षेत्र में हिमाच्छादन का आंकलन”  - ड्यारा बुगयाल को एक शीतकालीन क्रीडा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को आंकलित करता एक अध्ययन – “हिमालय का भूगतिकी तथा पर्यावरणीय प्रबंधन”, श्रीनगर (गढ़वाल) में 4-6 दिसंबर, 2000 को सम्पन्न हुए राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2000) -  “गढ़वाल हिमालय के गंगोत्री हिमनद के पिघलते-बहते जल में अंतर्वृद्धि”  -“हिमालय का भूगतिकी तथा पर्यावरणीय प्रबंधन”, श्रीनगर (गढ़वाल) में 4-6 दिसंबर, 2000 को सम्पन्न हुए राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत
  • ए.के.  टांगड़ी (2000) – “उत्तर प्रदेश में अशांत नदी प्रणालियों तथा स्थाई जल निकायों में स्वतः प्रवाहित होने वाले तलछट की सांद्रता निर्धारण हेतु वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया के उपाय तथा तलछट के मैलेपन का स्तर” – कोच्चि में 17-20 अक्तूबर, 2000 को सम्पन्न भारतीय सेडिमेंटोलोजिस्ट संघ के राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए.के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (1999) -  “उत्तराखंड के उत्तर काशी जनपद में गंगोत्री ग्लेशियर घाटी के पेलियो-जियोग्राफिकल और पैलियो-क्लाइमैटिक पुनर्निर्माण में स्थलीय सुदूर संवेदन के पूरक के रूप में अंतरिक्ष जनित सेन्सिंग” -  भुवनेश्वर में 15-17 दिसम्बर, 1990 को सम्पन्न हुए आईएसआरएस के राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए.के. टांगड़ी,  राम चन्द्र  तथा राजीव कुमार (1999) -  “आईआरएस मल्टीडेट जिओकोडेड डाटा का प्रयोग करते हुए बिहार के पटना नगर के निकट सोन -गंगा तथा गंडक-गंगा नदियों के संगमों की स्थानिक गतिकी की निगरानी” -  भुवनेश्वर में 15-17 दिसम्बर, 1990 को सम्पन्न हुए आईएसआरएस के राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (1999) -  “उत्तराखंड के चमोली जनपद में बद्रीनाथ के उत्तर में हिमालयीन हिमनदों के पिघले जल की भौतिक – रासायनिक व हाइड्रोलोजिकल विशेषताएँ”  - लखनऊ में मार्च, 1999 में बर्फ़, हिम तथा हिमनद- एक हिमालयीन परिपेक्ष्य” पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  •  ए.के.टांगड़ी तथा राम चन्द्र (1999) – “उत्तराखंड के चमोली जनपद में अलकनंदा तथा धौलीगंगा नदी जलग्रहण क्षेत्र में हिमाच्छादन में लौकिक और स्थानिक भिन्नता की निगरानी के रूप में वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया और हिम पिघलने की भविष्यवाणी” - लखनऊ में मार्च, 1999 में बर्फ़, हिम तथा हिमनद एक हिमालयीन परिपेक्ष्य पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (1999) – “हिमनदी से पिघली जल धाराओं के हाइड्रोलॉजिकल व्यवहार के आंकलन में हिमाच्छादन विविधताओं, मौसम संबंधी मापदंडों और इलाके की विशेषताओं की परस्पर क्रिया को समझना” उत्तराखंड के चमोली जनपद में अलकनंदा नदी की केस स्टडी लखनऊ में मार्च, 1999 में बर्फ़, हिम तथा हिमनद एक हिमालयीन परिपेक्ष्य पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए.के. टांगड़ी, राजीव कुमार तथा राम चन्द्र (1999) -  “ वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया मापन के माध्यम से हिमनदीय धाराओं के गाद के भार का गुणवत्ता आंकलन” – गढ़वाल हिमालय के गंगोत्री हिमनद के समाप्ति स्थल  के निकट भोजबासा में भागीरथी नदी की केस स्टडी | - लखनऊ में मार्च, 1999 में बर्फ़, हिम तथा हिमनद- एक हिमालयीन परिपेक्ष्य” पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  •  ए.के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा राजीव कुमार (1998) – “गंगा नदी की गतिकी का अभियांत्रिकी संरचनाओं पर प्रभाव” – मल्टीडेट उपग्रह डाटा का प्रयोग करते हुए बिहार राज्य के पटना जनपद में गंगा नदी पर पुल निर्माण हेतु उचित स्थान के चयन हेतु एक अध्ययन – देहरादून में अक्तूबर 1998 में “प्राकृतिक संसाधन के आंकलन हेतु भू-सूचना” पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत |
  • ए.के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा राजीव कुमार (1998) – “परंपरागत कार्यप्रणालियों तथा सुदूर संवेदन डाटा का एकीकरण करके गढ़वाल हिमालय में भागीरथी नदी के गाद के भार का आंकलन – अलीगढ़ में 1998 में सम्पन्न “प्राकृतिक जोखिमों के शमन में में सुदूर संवेदन अनुप्रयोग पर कार्यशाला” में प्रस्तुत |
  •  ए.के. टांगड़ी राजीव कुमार तथा राम चन्द्र (1998) – उत्तर प्रदेश के एक भाग में बड़े पैमाने पर सारदा नदी द्वारा भूमि कटाव – मल्टी डेट उपग्रह डाटा के आधार पर एक आंकलन - अलीगढ़ में 1998 में सम्पन्न “प्राकृतिक जोखिमों के शमन में में सुदूर संवेदन अनुप्रयोग पर कार्यशाला” में प्रस्तुत |
  •  ए.के. टांगड़ी राजीव कुमार तथा राम चन्द्र (1999) - वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया मापन के माध्यम से हिमनदीय धाराओं के गाद के भार का गुणवत्ता आंकलन” - गढ़वाल हिमालय के गंगोत्री हिमनद के समाप्ति स्थल  के निकट भोजबासा में भागीरथी नदी की केस स्टडी | “बर्फ़, हिम व हिमनद पर जियोलोजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया के सम्मेलन में, विशेष पब्लिकेशन संख्या.53 के पृष्ठ संख्या 123-129 पर प्रकाशित
  • ए.वी. कुलकर्णी, राम चन्द्र, वी.सी. ठाकुर तथा जी. फिलिप (1999) – “सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए सतलुज नदी बेसिन के एक भाग में  हिमनदों की सूची” (सार) - लखनऊ में 9-11 मार्च, 1999 में बर्फ़, हिम तथा हिमनद एक हिमालयीन परिपेक्ष्य पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के कार्यवृत्त में पृष्ठ 105-106 पर प्रकाशित |
  •  ए.के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2003) - “सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी के माध्यम से गंगोत्री हिमनद के समाप्ति स्थल, संतुलन रेखा अक्षांस तथा पृथककरण क्षेत्र की स्थानिक निगरानी” – जलवायु विविधता के रहस्यों से पर्दा उठाता एक प्रयास – भारतीय भूगभिर्क सर्वेक्षण, लखनऊ में 26-28 मार्च, 2003 को गंगोत्री हिमनद पर सम्पन्न हुई कार्यशाला  में प्रस्तुत |
  •  ए. के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा एस. के. एस. यादव (2003) - “गढ़वाल हिमालय के हिमाद्रि क्षेत्र में नियो-टेक्टोनिज़्म” – ग्लेशियल स्ट्रीम मोरफोलोजी के माध्यम से रहस्योद्घाटित (सार) “29-30 जनवरी, 2003 को भूगर्भ शास्त्र विभाग, लखनऊ विश्व विद्यालय में आयोजित  हिमालयन ओरोजेन फोरलैंड संवाद पर राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत |
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2001) – “मल्टीडेट उपग्रह डाटा के प्रयोग द्वारा उत्तरांचल हिमालय में गंगोत्री हिमनद की संतुलन रेखा की स्थानिक निगरानी के माध्यम से जलवायु विविधता के रहस्यों से पर्दा उठाता एक अध्ययन” – अहमदाबाद में 11-13 दिसंबर, 2001 को सम्पन्न हुए आईएसआरएस राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रेषित किया गया |
  •  ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2000) - “सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए गढ़वाल हिमालय में स्थित भटवारी पश्चिम में ड्यारा बुगयाल क्षेत्र में हिमाच्छादन का आंकलन”  - ड्यारा बुगयाल को एक शीतकालीन क्रीडा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं को आंकलित करता एक अध्ययन – “हिमालय का भूगतिकी तथा पर्यावरणीय प्रबंधन” श्रीनगर (गढ़वाल) में 4-6 दिसंबर 2000 को सम्पन्न हुए राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत
  •  ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2000) - “गढ़वाल हिमालय के गंगोत्री हिमनद के पिघलते-बहते जल में अंतर्वृद्धि”  -“हिमालय का भूगतिकी तथा पर्यावरणीय प्रबंधन”, श्रीनगर (गढ़वाल) में 4-6 दिसंबर, 2000 को सम्पन्न हुए राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत
  • एए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा राजीव कुमार (1999) - “आईआरएस मल्टीडेट जिओकोडेड डाटा का प्रयोग करते हुए बिहार के पटना नगर के निकट सोन -गंगा तथा गंडक-गंगा नदियों के संगमों की स्थानिक गतिकी की निगरानी” -  भुवनेश्वर में 15-17 दिसम्बर, 1990 को सम्पन्न हुए आईएसआरएस के राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए.के.टांगड़ी -  “ वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया मापन के माध्यम से हिमनदीय धाराओं के गाद के भार का गुणवत्ता आंकलन” – गढ़वाल हिमालय के गंगोत्री हिमनद के समाप्ति स्थल  के निकट भोजबासा में भागीरथी नदी की केस स्टडी | - लखनऊ में मार्च, 1999 में बर्फ़, हिम तथा हिमनद- एक हिमालयीन परिपेक्ष्य” पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत |
  • ए.वी.कुलकर्णी तथा राम चन्द्र (1999) – “सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के माध्यम से सतलुज नदी बेसिन में स्थित हिमनदों की सूची” – हिमालयन जियोलोजी वॉल्यूम 20 संख्या-02 पृष्ठ 45-52 पर प्रकाशित
  • ए. वी. कुलकर्णी तथा राम चन्द्र (1999)- “सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के माध्यम से सतलुज नदी बेसिन में स्थित हिमनदों की सूची” – “बर्फ हिम तथा हिमनद – एक हिमालयीन परिपेक्ष्य”  पर मार्च 1999 में लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत
  • ए.के.टांगड़ी राम चन्द्र तथा राजीव कुमार (1998) – “गंगा नदी की गतिकी का अभियांत्रिकी संरचना पर प्रभाव” – “मल्टीडेट उपग्रह डाटा के माध्यम से बिहार के पटना जनपद में गंगा नदी पर पुल निर्माण हेतु उपयुक्त स्थान की खोज”  -  आई आई आर एस देहरादून में अक्तूबर 1998 में “प्राकृतिक संसाधन के आंकलन निगरानी एवं प्रबंधन हेतु भू-सूचना” (भू-सूचना 2000 के बाद) पर सम्पन्न अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत
  • ए. के. टांगड़ी  राजीव कुमार तथा राम चन्द्र (1998)-  “उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में भागीरथी नदी के गाद भार के आंकलन हेतु सुदूर संवेदी डाटा तथा परंपरागत कार्यप्रणालियों का एकीकरण”  - अलीगढ़ में 1998 में सम्पन्न “प्राकृतिक जोखिमों के शमन में में सुदूर संवेदन अनुप्रयोग पर कार्यशाला” में प्रस्तुत |
  •   डी.के.जुगरान तथा राम चन्द्र (1998) -  “हवाई सुदूर संवेदन का प्रयोग करते हुए आंध्र प्रदेश के करीमनगर जिले के
  • ग्रेनाइटिक इलाके में उत्पादक क्षेत्रों के परिसीमन में भू आकृति क दृष्टिकोण”  - मैसूर में दिनांक 4-6 फ़रवरी, 1998 को सम्पन्न “ग्रेनाइट के विकास पर वैचारिक मॉडल पर राष्ट्रीय संगोष्ठी ग्रीनस्टोन बेल्ट ग्रैनुलाईट टैराइन्स और संबंधित खनिज भंडार में प्रस्तुत
  • राम चन्द्र (2019) – भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश में मृतप्राय हिंडन नदी का कायाकल्प तथा पुनरुद्धार
  • राम चन्द्र तथा ए.के. टांगड़ी (2018) – उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित सतोपंथ –भागीरथ खड़क हिमनदों की दीर्घकालीन निगरानी
  • राम चन्द्र तथा ए.के. टांगड़ी (2011) – ऑप्टिकल सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी के माध्यम से भारतीय हिमालय के बढ़ते हुए हिमनदों की गतिकी की निगरानी
  • ए. के टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2010) – “ऑप्टिकल तथा माइक्रोवेव सुदूर संवेदन की सहायता से उत्तराखंड हिमालय के गंगोत्री, सतोपंथ तथा भागीरथ खड़क हिमनदों के क्षेत्र में हिमाच्छादन में विभिन्नता का अध्ययन” – हिम की श्रेणी को वर्गीकृत करने तथा वहाँ से निकलने वाली नदी प्रणालियों पर इसके प्रभाव को आंकलित करता एक प्रयास
  •  राम चन्द्र (2012) - सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा उत्तर प्रदेश के तराई एवं भाबर क्षेत्रों में भूजल संसाधनों का चयनित नदी प्रणालियों के बहाव पर प्रभाव का आंकलन
  • राम चन्द्र तथा ए.के.टांगड़ी (2011) – “सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों में गाद भरने की दर की स्थानिक निगरानी तथा बाढ़ के कारणों को उजागर करता व उन्हें कम करने वाली रणनीतियों को दर्शाता एक प्रयास” – सारदा तथा घागरा नदी बेसिन की केस स्टडी 
  • ए.के. टांगड़ी, एस.के.एस.यादव तथा राम चन्द्र (2012) – “सुदूर संवेदन, जी आई एस तथा परंपरागत फ़ील्ड प्रौद्योगिकी के माध्यम से गोमती नदी का पुनः प्रवर्तन” |
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा अन्य (2005) – “उत्तरांचल हिमालय में भागीरथी नदी बेसिन में हिमाच्छादन”  -  डी एस टी –जी ओ आई के संकेत पर तैयार तथा पी ए एम सी (प्रोग्राम एडवाइज़री एंड मॉनिटरिंग कमेटी) को मार्च, 2005 में प्रेषित  
  • ए.के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) – हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव - अक्तूबर, 2004 में तकनीकी रिपोर्ट विनरॉक इन्टरनेशनल इंडिया, नई दिल्ली को भेजी गई |
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2006) – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा हिमालय के बर्फीले क्षेत्रों में हिमाच्छादन में विभिन्नता, हिम की श्रेणी का वर्गीकरण तथा इलाके की विशेषता का आंकलन   
  • ए.के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2005) – उत्तरांचल हिमालय के भागीरथी नदी बेसिन में हिमाच्छादन का एटलस | डीएसटी- जीओआई की प्रोग्राम एडवाइज़री तथा निगरानी कमेटी के संकेत पर तैयार तथा उन्हें मार्च, 2005 में सबमिट |
  •  ए.के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004)  परंपरागत सुदूर संवेदन व जीआईएस प्रौद्योगिकी के एकीकरण के माध्यम से उत्तरांचल हिमालय के उत्तरकाशी जनपद में भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुगयाल क्षेत्र को शीत कालीन क्रीड़ा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने के दृष्टिकोण से, हिमाच्छादन के बने रहने का मूल्यांकन |
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव - अक्तूबर, 2004 में तकनीकी रिपोर्ट विनरॉक इन्टरनेशनल इंडिया, नई दिल्ली को भेजी गई |
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) – उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदी प्रणालियों में गाद जमा होने तथा पर्यावरणीय ह्रास का आंकलन – बाढ़ के कारकों को उजागर करता तथा उन्हे कम करने की रणनीति दर्शाता एक प्रयास
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) – सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में गतिकी की निगरानी, बाढ़ का स्तर तथा भू-अभियांत्रिकी का आंकलन 
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) – उत्तरांचल हिमालय के गंगोत्री हिमनद में हिमाच्छादन में विभिन्नता की निगरानी में सुदूर संवेदन की भूमिका  - हिमनद हाइड्रोलोजी पर इसका प्रभाव तथा पिघले जल की वर्णक्रमीय प्रतिक्रियाओं के आंकलन का एक प्रयास
  • पी.एन. शाह, राम चन्द्र तथा अन्य (2004) – सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तरांचल के नैनीताल तथा अल्मोड़ा जनपदों में भूस्खलन के खतरों के क्षेत्र निर्धारित करता एक अध्ययन, जून, 2004, तकनीकी रिपोर्ट |
  • पी.एन. शाह, राम चन्द्र तथा अन्य (2004)  - उत्तरांचल के नैनीताल तथा अल्मोड़ा जनपदों के भागों में भूस्खलन के खतरों के क्षेत्रों का निर्धारण तथा भूस्खलन खतरों के प्रबंधन मानचित्रों का एटलस | अप्रैल, 2004 आरएसएसी, ईआरडी, एलएमपी, 2004:03
  • ए.के.टांगड़ी राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2003) – “हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” – ड्राफ़्ट तकनीकी रिपोर्ट  - फ़रवरी 2003 में तकनीकी रिपोर्ट विनरॉक इन्टरनेशनल इंडिया, नई दिल्ली को भेजी गई |
  • राम चंद्र (2003) उत्तरांचल के चमोली जनपद की ढलान तथा तथ्य” एक अन्तरिम तकनीकी रिपोर्ट एनआईसी नई दिल्ली को भेजी गई
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2000) – “सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी के माध्यम से उत्तराखंड राज्य के उत्तरकाशी जनपद में भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुग्याल क्षेत्र में हिमाच्छादन व इलाके की विशेषताओं का आंकलन” – ड्यारा बुग्याल क्षेत्र को शीतकालीन क्रीडा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आंकलन करती हुई एक केस स्टडी | 55 पृष्ठ की तकनीकी रिपोर्ट उत्तरांचल विकास विभाग को जून, 2000 में सौंपी गई |
  • ए. के. टांगड़ी (2000) – उत्तराखंड हिमालय के भागीरथी नदी बेसिन क्षेत्र में सुदूर संवेदन डाटा तथा परंपरागत कार्यप्रणालियों का एकीकरण कर हिम के पिघलने – अपवाह मॉडलिंग का आंकलन”   601 पृष्ठ की तकनीकी रिपोर्ट, भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग को जनवरी, 2000 में भेजी गई |
  • ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (1998) उपग्रह सुदूर संवेदन का प्रयोग करते हुए बनबासा बैराज नैनीताल जनपद तथा पालिया कलाँ खीरी जनपद के मध्य शारदा नदी के एक भाग की गतिकी की निगरानी” – आर एस ए सी – यू पी की तकनीकी रिपोर्ट प्रदेश के सिंचाई विभाग को प्रेषित की गई  
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा राजीव कुमार (1998) – सेटेलाइट इमेजरी के द्वारा बिहार राज्य के पटना नगर में प्रस्तावित रेल पुल हेतु गंगा नदी के व्यवहार पर की गई स्टडी की रिपोर्ट – यह तकनीकी रिपोर्ट राइट्स, नई दिल्ली हेतु तैयार की गई
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा राजीव कुमार (1997) – सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए बिहार राज्य के मुंगेर शहर के निकट गंगा नदी चैनल के एक भाग की स्थानिक निगरानी पर एक रिपोर्ट – गंगा नदी पर बने पुलों में से उचित पुल साइट के चयन का एक प्रयास – आरएसएसी-यूपी की तकनीकी रिपोर्ट राइट्स, नई दिल्ली हेतु तैयार की गई |
  •  ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2011) – उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों में गाद भर जाने की दर की स्थानिक निगरानी – सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए बाढ़ के कारणों पर से पर्दा उठाता तथा उन संकटों को कम करने की रणनीतियां बनाता एक प्रयास – सारदा तथा घाघरा नदी बेसिन की केस स्टडी
  • ए. के.  टांगड़ी तथा अन्य (2011) – सुदूर संवेदन जी आई एस तथा परंपरागत फ़ील्ड प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा गोमती नदी का पुनः प्रवर्तन
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2011) -  सिंधु नदी बेसिन में छे उप-बेसिन्स के हिमाच्छादन का एटलस
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2011) – उत्तराखंड हिमालय में भागीरथी नदी बेसिन में  हिमाच्छादन का एटलस
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2010) उत्तरांचल हिमालय के गंगोत्री तथा सतोपंथ क्षेत्र में ऑप्टिकल एवं माइक्रोवेव सुदूर संवेदन के द्वारा हिमाच्छादन में विभिन्नता का आंकलन – (डीएसटी-जीओआई को भेजे जाने हेतु परियोजना की तकनीकी रिपोर्ट अपनी तैयारी के अंतिम चरण में)
  • ए. के.  टांगड़ी तथा अन्य (2010) – ऑप्टिकल सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी की सहायता से भारतीय हिमालय में बढ़ते हिमनदों की गतिकी की निगरानी (डीएसटी-जीओआई को भेजे जाने हेतु परियोजना की तकनीकी रिपोर्ट अपनी तैयारी के अंतिम चरण में)
  • ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (2010) – भारतीय हिमालय में हिमाच्छादन में लौकिक व स्थानिक विभिन्नता की निगरानी (डीएसटी-जीओआई को भेजे जाने हेतु परियोजना की तकनीकी रिपोर्ट अपनी तैयारी के अंतिम चरण में)
  •  ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2009) – हिमालय के चमोली क्षेत्र में जीएएमएमए  इन-एसएआर सॉफ्टवेयर का प्रयोग करते हुएएसएआर रो डाटा प्रोसेसिंग
  •  ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (2009) -  हिमनदों के अध्ययनों हेतु इंटर्फ़ेरोमेट्री प्रौद्योगिकी पर एक अत्याधुनिक रिपोर्ट
  •  ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (2008) – उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदी प्रणालियों में पर्यावरणीय ह्रास तथा गाद जमा होने का आंकलन – बाढ़ आने के सकारात्मक कारकों पर से पर्दा उठाता तथा उन खतरों को कम करने की रणनीतियाँ बनाता एक प्रयास
  •  ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (2008) – भागीरथी नदी बेसिन के हिमाच्छादन का एटलस |
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (2006) – उत्तरकाशी जनपद के गंगोत्री हिमनद के हिमाच्छादन की निगरानी में सुदूर संवेदन की भूमिका – हिमनदों की हाइड्रोलोजी तथा परिणामस्वरूप पिघले जल की वर्णक्रमीय प्रतिक्रिया पर इसके प्रभाव को आंकलित करता एक प्रयास
  •  ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (2004) – हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव | 
  • ए.के. टांगड़ी (2000) – सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी की सहायता से उत्तरकाशी जनपद में भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुग्याल क्षेत्र में हिमाच्छादन की विभिन्नता तथा इलाके की विशेषताओं का आंकलन – ड्यारा बुग्याल को शीतकालीन क्रीडा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर केस स्टडी – 55 पृष्ठ की तकनीकी रिपोर्ट प्रदेश के उत्तरांचल विकास विभाग को जून, 200 में सौंपी गई |
  • ए. के. टांगड़ी (2000) - – उत्तराखंड हिमालय के भागीरथी नदी बेसिन क्षेत्र में सुदूर संवेदन डाटा तथा परंपरागत कार्यप्रणालियों का एकीकरण कर हिम के पिघलने – अपवाह मॉडलिंग का आंकलन”   601 पृष्ठ की तकनीकी रिपोर्ट, भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग को जनवरी, 2000 में भेजी गई |
  • ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (1999) -  उपग्रह सुदूर संवेदन की सहायता से कानपुर में प्रस्तावित गंगा बैराज के निकट ही गंगा नदी के विन्यास की लौकिक निगरानी -  आरएसएसी – यूपी की तकनीकी रिपोर्ट बैराज निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश को भेजी गई है |
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (1998) –उपग्रह सुदूर संवेदन का प्रयोग करते हुए बनबासा बैराज नैनीताल जनपद तथा पालिया कलाँ खीरी जनपद के मध्य शारदा नदी के एक भाग की गतिकी की निगरानी  - आरएसएसी – यूपी की तकनीकी रिपोर्ट बैराज निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश को भेजी गई है |
  •  ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (1998) – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी की सहायता से  उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में शारदा नदी की  गतिकी, बाढ़ स्थिति तथा भू – अभियांत्रिकी का आंकलन
  • ए.के. टांगड़ी तथा अन्य (1998) -  सेटेलाइट इमेजरी के द्वारा बिहार राज्य के पटना नगर में प्रस्तावित रेल पुल हेतु गंगा नदी के व्यवहार पर की गई स्टडी की रिपोर्ट – यह तकनीकी रिपोर्ट राइट्स, नई दिल्ली हेतु तैयार की गई
  • ए. के. टांगड़ी तथा अन्य (1997) - सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए बिहार राज्य के मुंगेर शहर के निकट गंगा नदी चैनल के एक भाग की स्थानिक निगरानी पर एक रिपोर्ट – गंगा नदी पर बने पुलों में से उचित पुल साइट के चयन का एक प्रयास – आरएसएसी-यूपी की तकनीकी रिपोर्ट राइट्स, नई दिल्ली हेतु तैयार की गई |
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2007) – भागीरथी नदी बेसिन में हिमाच्छादन का एटलस
  •  ए.के. टांगड़ी राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2006) – “सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए हिमालय क्षेत्र के एक बर्फीले भाग में हिमाच्छादन में विभिन्नता का आंकलन तथा इलाके की विशेषता हिम का वर्गीकरण
  • ए.के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) – उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदी प्रणालियों में गाद भरने तथा पर्यावरण ह्रास का आंकलन -  बाढ़ आने के कारकों पर से पर्दा उठाता तथा उन कारणों को कम करने की रणनीति बनाता एक प्रयास
  • ए.के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2004) – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में  गतिकी, बाढ़ स्थिति तथा भू अभियांत्रिकी  का आंकलन
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा (2004) – उत्तरांचल हिमालय के गंगोत्री हिमनद क्षेत्र में हिमाच्छादन में विभिन्नता  के आंकलन में सुदूर संवेदन की भूमिका – हिमनदों की हाइड्रोलोजी पर इसका प्रभाव तथा परिणामस्वरूप पिघले जल की वर्णक्रमीय  प्रतिकृया का आंकलन करता एक प्रयास 
  • पी. एन. शाह, राम चंद्र तथा अन्य (2004) – सुदूर संवेदन तथा जीआईएस प्रौद्योगिकी के प्रयोग द्वारा उत्तरांचल के नैनीताल तथा अल्मोड़ा जनपदों के भागों में भूस्खलन के खतरों वाले क्षेत्रों पर अध्ययन- जून, 2004
  • पी. एन. शाह, राम चन्द्र तथा अन्य (2004)- उत्तरांचल के नैनीताल तथा अल्मोड़ा जनपदों के कुछ भागों में भूस्खलन के खतरे वाले क्षेत्रों का एटलस तथा उन खतरों के प्रबंधन के मानचित्र  – अप्रैल, 2004 – आकर स ए सी-ई आर डी ; एल एम पी ; 2004;03   
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2003)- “उत्तरांचल हिमालय में घटते हिमनद” पर एक संक्षिप्त वैज्ञानिक नोट
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2003) – “हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” – तकनीकी रिपोर्ट का मसौदा – 148 पृष्ठ की रिपोर्ट फ़रवरी, 2003 में तैयार कर विनरॉक इंडिया इंटरनेशनल, नई दिल्ली को भेजी गई 
  • राम चन्द्र (2003) – “उत्तरांचल में चमोली जपदीय क्षेत्र की ढलान और तथ्य” पर एक अन्तरिम तकनीकी रिपोर्ट फ़रवरी, 2003 में एनआईसी, नई दिल्ली को भेजी गई |
  • ए. के. टांगड़ी, राम चन्द्र तथा एस.के.एस. यादव (2002)- – “हिमालयीन हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव” – स्टेटस तकनीकी रिपोर्ट- अगस्त 2002 में तैयार कर विनरॉक इंडिया इंटरनेशनल, नई दिल्ली को भेजी गई 
  •  पी.एन.शाह, राम चन्द्र तथा अन्य (2001) – सुदूर संवेदन तथा जी आई एस प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तरांचल तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों में भू स्खलन के खतरों वाले क्षेत्रों का मानचित्रण | एनआरएसए, डीओएस, जीओआई, हैदराबाद द्वारा प्रकाशित
  •  राम चन्द्र (2001) – “उत्तरांचल के उत्तरकाशी जनपद में गंगनानि – हर्सिल – गंगोत्री- गौमुख तीर्थयात्रा मार्ग पर भूस्खलन, संरचना तथा भूगर्भीय स्थिति”  पर एक ड्राफ़्ट रिपोर्ट |
  • ए.के.टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2000) – सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए उत्तरकाशी जनपद में, भटवारी के पश्चिम में स्थित ड्यारा बुग्याल क्षेत्र में हिमाच्छादन व इलाके की विशेषताओं का आंकलन – ड्यारा बुग्याल क्षेत्र को शीतकालीन क्रीडा रिसोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आंकलन करती एक केस स्टडी | प्रदेश सरकार के उत्तरांचल विकास विभाग को जून, 2000 में 55 पृष्ठीय तकनीकी रिपोर्ट भेजी गई |
  •  ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (2000) – उत्तर प्रदेश में भागीरथी नदी बेसिन में  हिम के पिघलने तथा अपवाह मॉडलिंग हेतु सुदूर संवेदन तथा परंपरागत कार्य प्रणालियों का एकीकरण – 601 पृष्ठीय तकनीकी रिपोर्ट भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग को जनवरी, 2001 में भेजी गई |
  • ए.के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (1998) – बिहार राज्य के पटना जनपद में प्रस्तावित रेल पुल हेतु सेटेलाइट इमेजरी के द्वारा गंगा नदी के व्यवहार के अध्ययन पर एक रिपोर्ट | राइट्स, नई दिल्ली के लिए तैयार आरएसएसी-यूपी की अन्तरिम तकनीकी रिपोर्ट
  • राम चन्द्र (1999) – स्टेट-ऑफ-द-आर्ट रिपोर्ट ऑन एस ए आर इनफोरमेटरी टेक्नोलोजी फॉर ग्लेशिओलोजिकल स्टडीज़ – सीएसआरई, आईआईटी बंबई को तकनीकी रिपोर्ट भेजी गई 
  • राम चन्द्र (1999) –जीएएमएमए इन एसएआर सॉफ्टवेयर का प्रयोग करते हुए  हिमालय के चमोली क्षेत्र में एसएआर  रो डाटा की प्रोसेसिंग – तकनीकी रिपोर्ट सीएसआरई आईआईटी बंबई को भेजी गई |
  • ए. के. टांगड़ी तथा राम चन्द्र (1998) - बिहार राज्य के पटना जनपद में प्रस्तावित रेल पुल हेतु सेटेलाइट इमेजरी के द्वारा गंगा नदी के व्यवहार के अध्ययन पर एक रिपोर्ट | राइट्स, नई दिल्ली के लिए तैयार आरएसएसी-यूपी की अन्तरिम तकनीकी रिपोर्ट